वेद ही सच्चे और शाश्वत ज्ञान का एकमात्र स्रोत

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वेद ही सच्चे और शाश्वत ज्ञान का एकमात्र स्रोत


कठुआ, 01 मई (हि.स.)। योल स्थित वेद मंदिर में चल रहे 78 दिवसीय यज्ञ के दौरान योगाचार्य स्वामी राम स्वरूप जी ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि चारों वेद ही मानवता के लिए सच्चे और शाश्वत ज्ञान का एकमात्र प्रमाणिक स्रोत हैं। यह यज्ञ चारों वेदों के अध्ययन और प्रसार को समर्पित है, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालु और साधक भाग ले रहे हैं।

स्वामी जी ने ऋग्वेद (1/105) के मंत्र 14 और 15 की व्याख्या करते हुए कहा कि मनुष्य को ऐसे विद्वानों का मार्गदर्शन लेना चाहिए जो न केवल वेदों के ज्ञाता हों, बल्कि अपने आचरण में भी वैदिक ज्ञान को अपनाते हों। उन्होंने कहा कि सच्चे ज्ञानी व्यक्ति इंद्रियों पर नियंत्रण रखते हैं और कठिन वैदिक तपस्या के माध्यम से स्वयं को अनुशासित करते हैं। उन्होंने बताया कि ऐसे योग साधक समाज के लिए प्रकाश स्तंभ की तरह होते हैं, जो लोगों को सच्चे ज्ञान, अनुशासित जीवन और पापों से मुक्ति का मार्ग दिखाते हैं। स्वामी जी ने कहा कि दुर्भाग्यशाली लोग ही ऐसे विद्वानों की उपेक्षा करते हैं और वैदिक मार्ग का विरोध करते हैं।

प्रवचन के दौरान स्वामी जी ने यह भी स्पष्ट किया कि ईश्वर की कृपा बिना कारण नहीं मिलती। यह तब प्राप्त होती है जब व्यक्ति अपने पूर्व जन्मों के पुण्य कर्मों के साथ-साथ वर्तमान जीवन में भी वैदिक सिद्धांतों के अनुसार अच्छे कर्म करता है। ऐसे कर्मों के फलस्वरूप व्यक्ति का मन शुद्ध होता है और वह परमात्मा की प्राप्ति की ओर अग्रसर होता है। ऋग्वेद के मंत्र 16 का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वैदिक मार्ग ईश्वर से उत्पन्न, अनादि, अनंत और अविनाशी है। यह मार्ग कभी नहीं बदलता और मानवता को सच्चे ज्ञान व स्थायी शांति की ओर ले जाता है। उन्होंने सभी से आग्रह किया कि वे इस शाश्वत मार्ग को श्रद्धा और समर्पण के साथ अपनाएं। यह प्रवचन चल रहे यज्ञ का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा, जो लोगों को वैदिक दर्शन की गहराई समझने और उसे जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित कर रहा है। कार्यक्रम के माध्यम से सत्य, अनुशासन और आध्यात्मिक जागृति पर आधारित जीवन शैली का संदेश दिया जा रहा है।

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हिन्दुस्थान समाचार / सचिन खजूरिया

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