यूजीसी के समानता नियम समावेशी शिक्षा के लिए मील का पत्थर: बलबीर
जम्मू, 16 जनवरी (हि.स.)। जम्मू और कश्मीर भाजपा के प्रवक्ता और पूर्व उपाध्यक्ष बलबीर राम रतन ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए अधिसूचित नियम 2026 का स्वागत करते हुए इन्हें देश भर में भेदभाव मुक्त शैक्षणिक वातावरण बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है।
उन्होंने कहा कि इस महीने अधिसूचित और राजपत्र में प्रकाशन के बाद लागू हुए ये नियम भारत भर के सभी उच्च शिक्षा संस्थानों, जिनमें विश्वविद्यालय, कॉलेज और डीम्ड संस्थान शामिल हैं के लिए अनिवार्य हैं। बलबीर राम रतन ने कहा कि यह नया ढांचा केवल प्रशासनिक बदलावों से कहीं अधिक है और समानता के प्रति नैतिक, सामाजिक और संवैधानिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि दशकों से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों, आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों, अल्पसंख्यकों और दिव्यांगजनों के छात्र शैक्षणिक परिवेश में बहिष्कार और भेदभाव की शिकायत करते रहे हैं, जिसे ये नए नियम दूर करने का प्रयास करते हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ये नियम धर्म, जाति, नस्ल, लिंग, जन्म स्थान या दिव्यांगता के आधार पर भेदभाव को सख्ती से प्रतिबंधित करते हैं। अब संस्थानों को प्रभावी शिकायत निवारण प्रणाली स्थापित करने और नियमित निगरानी सुनिश्चित करने की आवश्यकता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / रमेश गुप्ता

