जनजातीय मामलों के विभाग ने 100% लक्ष्य हासिल किया, निधि उपयोग संबंधी भ्रामक दावों का खंडन किया

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जम्मू, 27 मार्च (हि.स.)। जनजातीय मामलों के विभाग ने उन हालिया रिपोर्टों का कड़ा और व्यापक खंडन जारी किया है जिनमें आरोप लगाया गया था कि जनजातीय कल्याण योजनाओं के लिए आवंटित निधि का 87 प्रतिशत अप्रयुक्त पड़ा है।

इन दावों को तथ्यात्मक रूप से गलत और घोर भ्रामक बताते हुए विभाग ने स्पष्ट किया कि ये दावे वास्तविक वित्तीय स्थिति या सार्वजनिक राजकोषीय चक्रों की सूक्ष्म प्रकृति को प्रतिबिंबित नहीं करते हैं।

विभाग ने इस संबंध में जारी अपने आधिकारिक विज्ञप्ति में स्पष्ट किया है कि वित्तीय वर्ष 2025-2026 का प्रदर्शन जनजातीय विकास के प्रति एक रणनीतिक और आक्रामक दृष्टिकोण को दर्शाता है, जो कई प्रमुख योजनाओं में 100 प्रतिशत उपयोग की उपलब्धि से समर्थित है।

विभाग की वित्तीय स्थिति को समझने के लिए निधि उपयोग का मूल्यांकन योजनावार किया जाना चाहिए न कि विकृत समग्र दृष्टिकोण से। उदाहरण के लिए, विभाग ने मानव-पूंजी संबंधी महत्वपूर्ण पहलों में 100 प्रतिशत उपयोग दर्ज किया है जिनमें अनुसूचित जनजाति छात्रों के लिए पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति और प्रधानमंत्री आदि आदर्श ग्राम योजना शामिल हैं। इन निधियों का पूर्ण वितरण पात्र लाभार्थियों को किया जा चुका है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि शैक्षिक सहायता और ग्राम विकास जमीनी स्तर तक सीधे पहुंचे।

इसी प्रकार जनजातीय अनुसंधान संस्थान में 99.85 प्रतिशत की प्रभावशाली दर से लगभग पूर्ण उपयोग देखा गया है जो उच्च स्तर की प्रशासनिक दक्षता और जनजातीय विरासत और अनुसंधान के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

विभाग ने चरणबद्ध व्यय मॉडल पर संचालित बुनियादी ढांचे और जिला स्तरीय परियोजनाओं की प्रगति पर भी प्रकाश डाला।

जनजातीय कल्याण के लिए बुनियादी ढांचे हेतु केंद्र शासित प्रदेश के पूंजीगत व्यय बजट के तहत, जमीनी स्तर पर कार्य प्रगति के साथ 59 प्रतिशत से अधिक व्यय दर्ज किया जा चुका है।

जबकि जनजातीय उप-योजना में वर्तमान में 23.52 प्रतिशत उपयोग दर दर्शाई गई है, यह आंकड़ा जिला कोषागारों में वर्तमान में सक्रिय रूप से चल रहे भुगतानों का एक संक्षिप्त विवरण है।

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हिन्दुस्थान समाचार / SONIA LALOTRA

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