वार्षिक मेले के लिए गांदरबल के माता खीर भवानी मंदिर में हजारों श्रद्धालु हुए एकत्रित
गांदरबल, 22 जून (हि.स.)। आस्था, भक्ति और सांप्रदायिक सद्भाव का जीवंत प्रदर्शन करते हुए जम्मू और कश्मीर तथा देश के विभिन्न हिस्सों से हजारों कश्मीरी पंडित गांदरबल के तुलमुल्ला स्थित माता खीर भवानी मंदिर में वार्षिक मेले में भाग लेने के लिए एकत्रित हुए। भक्त सुबह तड़के ही मंदिर पहुंचने लगे थे ताकि वे प्रार्थना कर सकें और मंदिर की अधिष्ठात्री देवी रागन्या देवी का आशीर्वाद प्राप्त कर सकें।
मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में तीर्थयात्री उमड़े जिनमें से कई विभिन्न राज्यों से इस सदियों पुराने धार्मिक उत्सव में भाग लेने आए थे। मंदिर का वातावरण आध्यात्मिक उत्साह से भरा हुआ था क्योंकि भक्तों ने पारंपरिक अनुष्ठान किए, पवित्र झरने पर दूध और खीर (चावल की खीर) अर्पित की और सभी समुदायों की शांति, समृद्धि और कल्याण के लिए प्रार्थना की। मेले के सुचारू संचालन के लिए प्रशासन द्वारा व्यापक व्यवस्था की गई थी।
तीर्थयात्रियों की सहायता और उनकी सुरक्षा एवं आराम सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षाकर्मी, स्वास्थ्य सेवाएं, परिवहन सुविधाएं, सफाईकर्मी और स्वयंसेवक दिनभर तैनात रहेंगे।
कश्मीरी मुसलमानों ने भी कश्मीरी पंडितों के साथ मिलकर वार्षिक तीर्थयात्रा की व्यवस्था करने में सहयोग दिया। उनका सहयोग कश्मीर की सदियों पुरानी सांप्रदायिक सद्भाव और भाईचारे की परंपरा की भावना को दर्शाता है। कई श्रद्धालुओं ने तीर्थस्थल पर दर्शन करने और अपनी सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक जड़ों से पुनः जुड़ने पर प्रसन्नता व्यक्त की। कई लोगों ने इस आयोजन को एक भावनात्मक और महत्वपूर्ण अवसर बताया जिससे घाटी के साथ उनका बंधन और मजबूत हुआ।
वार्षिक खीर भवानी मेला कश्मीरी पंडित समुदाय के लिए सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजनों में से एक है और हर साल देश भर से श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। कश्मीरी पंडितों ने अपने मुस्लिम पड़ोसियों द्वारा दिए गए समर्थन की सराहना की है और इसे आपसी सम्मान और सह-अस्तित्व के अटूट बंधन का प्रमाण बताया है जो सदियों से कश्मीर की पहचान रहा है।
ज्येष्ठ अष्टमी के शुभ अवसर पर पारंपरिक रूप से आयोजित होने वाला यह वार्षिक मेला
मंदिर परिसर में स्थित पवित्र झरने पर एकत्रित होकर माता खीर भवानी का आशीर्वाद प्राप्त करने और प्रार्थना करने वाले भक्तों के लिए अत्यंत आध्यात्मिक महत्व रखता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुमन लता

