अथर्ववेद के ज्ञान और युवाओं की जिज्ञासाओं से ज्ञानमय हुआ अमृत कथा का नवम दिवस
कठुआ, 12 अगस्त (हि.स.)। आर्य समाज मंदिर कठुआ में आयोजित 28वीं अमृत कथा के नवम दिवस पर गायत्री देवी ने अथर्ववेद, ऋषि परंपरा, गौ माता और महर्षि दयानंद सरस्वती के वैदिक चिंतन पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वेद मानव जीवन को सत्य, सदाचार, संयम, कर्तव्य और लोककल्याण की दिशा प्रदान करते हैं।
कथा में युवाओं की जिज्ञासाओं और प्रश्नों को विशेष स्थान दिया गया। हवन एवं कथा के महत्व से जुड़े सवालों का उत्तर देते हुए उन्होंने कहा कि वैदिक परंपराओं के पीछे निहित ज्ञान, अनुशासन, आत्मचिंतन और जीवन मूल्यों को समझना आवश्यक है। उन्होंने युवाओं से वेदों का अध्ययन करने तथा प्रश्नों के उत्तर तर्क, सत्य और विवेक के आधार पर खोजने का आह्वान किया। उन्होंने ऋषि परंपरा से सत्यनिष्ठा, अनुशासन और समाज के प्रति जिम्मेदारी की प्रेरणा लेने का संदेश दिया। साथ ही महर्षि दयानंद सरस्वती के विचारों का उल्लेख करते हुए वेदों के मूल ज्ञान, शिक्षा और सामाजिक सुधार की दिशा में आर्य समाज के योगदान पर प्रकाश डाला। कथा के दौरान प्रस्तुत भजनों से वातावरण भक्तिमय हो गया। आर्य समाज कठुआ के प्रधान बिशन भारती ने पूजनीय गायत्री देवी जी का आभार व्यक्त करते हुए श्रद्धालुओं और युवाओं से आगामी कार्यक्रमों में अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की।
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हिन्दुस्थान समाचार / सचिन खजूरिया

