युक्त मन योग साधना और ब्रह्मानंद-वेद मंदिर योल में गूंजा मोक्ष प्राप्ति का संदेश
कठुआ, 27 जून (हि.स.)। वेद मन्दिर योल में आयोजित 78 दिवसीय चारों वेदों के यज्ञानुष्ठान के 77वें दिन आध्यात्मिक वातावरण में स्वामी राम स्वरूप जी योगाचार्य ने श्रद्धालुओं को यजुर्वेद मंत्र 11/2 का गूढ़ उपदेश दिया।
अपने प्रवचन में उन्होंने कहा कि योग विद्या के जिज्ञासु साधक “युक्तेन मनसा” अर्थात संयमित और एकाग्र मन से योगाभ्यास करते हुए परमेश्वर की सृष्टि में सुख-शांति की प्राप्ति कर सकते हैं। योगी जब समाधि अवस्था में प्रवेश करता है तब वह ज्योतिस्वरूप परमात्मा के “सोम रस” यानी दिव्य आनंद का अनुभव करता है। स्वामी जी ने उपस्थित साधकों को प्रेरित करते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को नियमित योगाभ्यास और वेदाध्ययन के माध्यम से ब्रह्म की अनुभूति का प्रयास करना चाहिए। इसी मार्ग पर चलकर मनुष्य मोक्ष पद को प्राप्त कर सकता है।
उन्होंने आगे कहा कि वेदों के अनुसार योग विद्या और वेदों का अध्ययन मनुष्य के भीतर की अविद्या (अज्ञान) और समस्त क्लेशों का नाश करता है जिससे जीवन में वास्तविक शांति और आत्मिक उन्नति संभव होती है। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और यज्ञानुष्ठान में भाग लेकर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त किया।
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हिन्दुस्थान समाचार / सचिन खजूरिया

