शिक्षकों के आर्थिक सम्मान का मुद्दा उठा, निजी शिक्षकों को 21 हजार और अकादमिक शिक्षकों को 57,700 मानदेय देने की मांग

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शिक्षकों के आर्थिक सम्मान का मुद्दा उठा, निजी शिक्षकों को 21 हजार और अकादमिक शिक्षकों को 57,700 मानदेय देने की मांग


कठुआ, 05 सितंबर (हि.स.)। शिक्षक दिवस के अवसर पर अमरीश जसरोटिया ने अपने कार्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में निजी स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों तथा महाविद्यालयों में अकादमिक व्यवस्था के आधार पर कार्यरत सहायक प्राध्यापकों एवं व्याख्याताओं से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए। उन्होंने सरकार से शिक्षकों के लिए सम्मानजनक वेतन और न्यायसंगत मानदेय सुनिश्चित करने की मांग की।

जसरोटिया ने कहा कि कई निजी स्कूलों में योग्य एवं प्रशिक्षित शिक्षकों को बेहद कम वेतन दिया जा रहा है। स्थिति यह है कि कुछ शिक्षकों का मासिक वेतन एक सामान्य मजदूर की आय से भी कम है। उन्होंने इसे शिक्षकों के आर्थिक शोषण के साथ-साथ उनकी योग्यता, मेहनत और सामाजिक सम्मान के साथ अन्याय करार दिया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के भविष्य को आकार देने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाने वाले शिक्षकों को उनकी योग्यता और कार्य के अनुरूप सम्मानजनक वेतन मिलना चाहिए। उन्होंने सरकार से निजी स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों के लिए स्पष्ट न्यूनतम वेतन नीति लागू करने तथा योग्य निजी शिक्षकों को कम से कम 21 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन सुनिश्चित करने की मांग की।

पत्रकार वार्ता में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में अकादमिक व्यवस्था के आधार पर कार्यरत सहायक प्राध्यापकों के मानदेय में कथित भारी अंतर का मुद्दा भी उठाया गया। जसरोटिया के अनुसार लद्दाख में इस व्यवस्था के तहत सहायक प्राध्यापकों को 57,700 रुपये प्रतिमाह जबकि जम्मू-कश्मीर में मात्र 28,000 रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि समान शैक्षणिक योग्यता और लगभग समान प्रकार की जिम्मेदारियां निभाने वाले शिक्षकों के मानदेय में इतना बड़ा अंतर क्यों है।

उन्होंने सरकार से जम्मू-कश्मीर में अकादमिक व्यवस्था के आधार पर कार्यरत सहायक प्राध्यापकों एवं व्याख्याताओं के मानदेय की तत्काल समीक्षा कर इसे बढ़ाकर 57,700 रुपये प्रतिमाह करने की मांग की। जसरोटिया ने कहा कि शिक्षक दिवस केवल शिक्षकों को शुभकामनाएं देने तक सीमित नहीं रहना चाहिए बल्कि उनके आर्थिक सम्मान, उचित वेतन और सेवा सुरक्षा सुनिश्चित करने का अवसर भी होना चाहिए। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि शिक्षकों की योग्यता और जिम्मेदारियों को ध्यान में रखते हुए उन्हें ऐसा पारिश्रमिक दिया जाए जिससे उन्हें आर्थिक कठिनाइयों का सामना न करना पड़े।

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हिन्दुस्थान समाचार / सचिन खजूरिया

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