भारत-तिब्बत सहयोग मंच ने संगठनात्मक गतिविधियों को दिया नया विस्तार

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भारत-तिब्बत सहयोग मंच ने संगठनात्मक गतिविधियों को दिया नया विस्तार


जम्मू, 14 जून (हि.स.)। भारत-तिब्बत सहयोग मंच (बीटीएसएम) के राष्ट्रीय बौद्धिक प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय सह-संयोजक एवं जम्मू-कश्मीर तथा लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. विवेक शर्मा तथा प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. राजेश शर्मा ने महत्वपूर्ण संगठनात्मक दौरा कर शैक्षणिक और सामाजिक क्षेत्रों में संगठन की गतिविधियों को सशक्त बनाने की दिशा में कई महत्वपूर्ण पहल की। दौरे के दौरान दोनों नेताओं ने सरदार पटेल विश्वविद्यालय मंडी हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला तथा केंद्रीय विश्वविद्यालय हिमाचल प्रदेश सहित विभिन्न उच्च शिक्षण संस्थानों से जुड़े शिक्षकों, शिक्षाविदों और बुद्धिजीवियों के साथ बैठकें और संवाद कार्यक्रम आयोजित किए। इन बैठकों में तिब्बत के मुद्दे के प्रति जागरूकता बढ़ाने, युवाओं में राष्ट्रीय चेतना को प्रोत्साहित करने तथा विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में भारत-तिब्बत सहयोग मंच की गतिविधियों के विस्तार पर विशेष चर्चा हुई।

विश्वविद्यालयों के शिक्षकों और शोधकर्ताओं के साथ हुई बैठकों में संगठनात्मक नेटवर्क को मजबूत करने, छात्र एवं बौद्धिक मंचों के गठन तथा भारत की सांस्कृतिक विरासत, भारत-तिब्बत संबंधों और तिब्बत से जुड़े मुद्दों पर शैक्षणिक समुदाय की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने पर विचार-विमर्श किया गया। डॉ. विवेक शर्मा और डॉ. राजेश शर्मा ने इस अवसर पर कहा कि शैक्षणिक संस्थानों को रचनात्मक संवाद और जागरूकता अभियानों से जोड़ना आवश्यक है ताकि विद्यार्थियों में तिब्बत से जुड़े ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामरिक पहलुओं की बेहतर समझ विकसित हो सके।

दौरे का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मैक्लोडगंज में तिब्बती निर्वासित प्रशासन के वरिष्ठ प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक रही। प्रतिनिधिमंडल ने वित्त मंत्री त्सेरिंग धुंडुप, तिब्बती संसद-इन-एक्जाइल के सदस्यों, शिक्षा सचिव तथा केंद्रीय तिब्बती प्रशासन के अन्य अधिकारियों एवं गणमान्य व्यक्तियों से मुलाकात की। इस दौरान तिब्बती समुदाय की वर्तमान स्थिति, उनकी सांस्कृतिक एवं धार्मिक पहचान के संरक्षण की चुनौतियों तथा तिब्बत के मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय जागरूकता और समर्थन की आवश्यकता पर विस्तृत चर्चा हुई।

बैठक में भारत और तिब्बत के लोगों के बीच आपसी समझ और सहयोग को मजबूत बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई गई। साथ ही छात्रों, शोधकर्ताओं और नागरिक समाज के बीच तिब्बत से जुड़े मानवीय, सांस्कृतिक और भू-राजनीतिक पहलुओं पर जागरूकता बढ़ाने के लिए भविष्य में संयुक्त कार्यक्रम आयोजित करने पर भी सहमति बनी।

हिन्दुस्थान समाचार / राहुल शर्मा

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