डोगरी को नजरअंदाज करने पर भड़की डोगरा ब्राह्मण प्रतिनिधि सभा, आरबीआई की भर्ती अधिसूचना वापस लेने की उठी मांग, ‘भेदभावपूर्ण’ बताया निर्णय

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डोगरी को नजरअंदाज करने पर भड़की डोगरा ब्राह्मण प्रतिनिधि सभा, आरबीआई की भर्ती अधिसूचना वापस लेने की उठी मांग, ‘भेदभावपूर्ण’ बताया निर्णय


जम्मू, 03 मार्च (हि.स.)। जम्मू की 150 वर्ष पुरानी संस्था डोगरा ब्राह्मण प्रतिनिधि सभा जम्मू ने भारतीय रिजर्व बैंक की हालिया भर्ती अधिसूचना पर कड़ा एतराज जताते हुए इसे तुरंत वापस लेने की मांग की है। सभा के अध्यक्ष वेद प्रकाश शर्मा ने मंगलवार को कार्यकर्ताओं की बैठक में कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा 16 फरवरी को जारी असिस्टेंट पदों की अधिसूचना में जम्मू केंद्र के लिए स्थानीय भाषा के रूप में केवल हिंदी, उर्दू और कश्मीरी का उल्लेख किया गया है जबकि डोगरी को शामिल नहीं किया गया।

उन्होंने आरोप लगाया कि डोगरी जो जम्मू की प्रमुख मातृभाषा है और भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में मान्यता प्राप्त भाषा होने के साथ-साथ केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर की आधिकारिक भाषाओं में शामिल है, उसे सूची से बाहर रखना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। सभा के चेयरमैन एवं पूर्व अतिरिक्त महाधिवक्ता एडवोकेट पी.सी. शर्मा ने इसे “भेदभावपूर्ण और अस्वीकार्य” करार देते हुए कहा कि डोगरी केवल संप्रेषण का माध्यम नहीं बल्कि डोगरा समुदाय की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान है। उन्होंने कहा कि भाषा को मान्यता न देने से डोगरा अभ्यर्थियों को प्रतिस्पर्धी भर्ती प्रक्रिया में नुकसान उठाना पड़ेगा।

सभा ने अधिसूचना को वर्तमान स्वरूप में तत्काल वापस लेकर उसमें डोगरी को स्थानीय भाषा के रूप में शामिल कर पुनः जारी करने की मांग की। संगठन ने संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने पर भी जोर दिया और जम्मू प्रांत के सभी राजनीतिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक संगठनों से एकजुट होकर आवाज उठाने की अपील की।

हिन्दुस्थान समाचार / राहुल शर्मा

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