समय रूपी अश्व पर सवार होकर ही मिलती है सफलता-स्वामी राम स्वरूप जी
कठुआ, 17 जून (हि.स.)। वेद मंदिर योल में चल रहे 78 दिवसीय चारों वेदों के यज्ञानुष्ठान के 67वें दिन स्वामी राम स्वरूप जी योगाचार्य ने श्रद्धालुओं को अथर्ववेद के गूढ़ संदेशों से अवगत कराया।
उन्होंने अथर्ववेद कांड 19 सूक्त 53 का उल्लेख करते हुए कहा कि परमेश्वर ने काल (समय) को अलंकारिक रूप में अश्व अर्थात घोड़ा बताया है जो निरंतर गतिमान रहता है। ज्ञानवान व्यक्ति इस समय रूपी अश्व पर सवार होकर अपने जीवन के लक्ष्य प्राप्त करते हैं जबकि आलस्य करने वाले लोग पीछे छूट जाते हैं। स्वामी जी ने समझाया कि समय अत्यंत शक्तिशाली, व्यापक और नित्य है इसलिए इसका एक क्षण भी व्यर्थ नहीं गंवाना चाहिए। उन्होंने कहा कि समय के साथ चलने वाले लोग ही अपने पुरुषार्थ से सफलता और समृद्धि प्राप्त करते हैं। उन्होंने आगे बताया कि वेदों का अध्ययन ही मनुष्य को समय के वास्तविक मूल्य का ज्ञान कराता है। जो व्यक्ति आध्यात्मिक और भौतिक दोनों प्रकार की उन्नति करते हुए समय का सदुपयोग करता है वही सुखमय और दीर्घ जीवन के साथ ईश्वर प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करता है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और वेदों के इस प्रेरणादायक संदेश को आत्मसात करने का संकल्प लिया।
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हिन्दुस्थान समाचार / सचिन खजूरिया

