अमावस्या पर वेद मंदिर योल में विशेष यज्ञानुष्ठान, स्वामी राम स्वरूप ने बताया आध्यात्मिक महत्व

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अमावस्या पर वेद मंदिर योल में विशेष यज्ञानुष्ठान, स्वामी राम स्वरूप ने बताया आध्यात्मिक महत्व


कठुआ, 17 अप्रैल (हि.स.)। योल स्थित स्थानीय वेद मंदिर में चारों वेदों के यज्ञानुष्ठान के अंतर्गत स्वामी राम स्वरूप योगाचार्य ने श्रद्धालुओं को अमावस्या के आध्यात्मिक महत्व से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि अमावस्या वह शुभ दिन है जब सूर्य और चंद्रमा एक साथ स्थित होते हैं। सूर्य जहां प्रकाश और तेज का प्रतीक है, वहीं चंद्रमा आनंद और सौम्यता का प्रतिनिधित्व करता है।

स्वामी जी ने कहा कि वेदों के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति को इन दिव्य गुणों को अपने जीवन में धारण करना चाहिए। उन्होंने अथर्ववेद के मंत्र 7/79/1 का उल्लेख करते हुए बताया कि इस दिन विद्वान जन मिलकर यज्ञ करते हैं, जिससे सौभाग्य, सुख, अन्न-धन और उत्तम संतान की प्राप्ति होती है। उन्होंने बताया कि अमावस्या का वास्तविक उद्देश्य यज्ञ और वेद साधना के माध्यम से जीवन में समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति लाना है। लेकिन वेद ज्ञान के अभाव में आज समाज में इस दिन को गलत परंपराओं जैसे नशा, मांसाहार और अंधविश्वासों से जोड़ दिया गया है, जो चिंताजनक है। स्वामी राम स्वरूप ने सभी से आह्वान किया कि वे प्राचीन वैदिक परंपराओं को अपनाएं और यज्ञ, वेद अध्ययन एवं सच्चे आचरण के माध्यम से भारत की प्राचीन गौरवशाली पहचान “विश्व गुरु” को पुनः स्थापित करने में योगदान दें।

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हिन्दुस्थान समाचार / सचिन खजूरिया

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