ओटीटी से सतलुज' फिल्म हटाए जाने पर सिख यूनाइटेड फ्रंट ने जताई आपत्ति

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ओटीटी से सतलुज' फिल्म हटाए जाने पर सिख यूनाइटेड फ्रंट ने जताई आपत्ति


जम्मू, 10 जुलाई (हि.स.)। सिख यूनाइटेड फ्रंट जम्मू-कश्मीर के अध्यक्ष एस. सुदर्शन सिंह वजीर ने विभिन्न सिख संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ प्रेस वार्ता में जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित फिल्म 'सतलुज' को ओटीटी प्लेटफॉर्म से हटाए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि फिल्म को स्ट्रीमिंग पर उपलब्ध होने के दो दिन बाद ही हटा दिया गया जबकि इसके पीछे किसी सरकारी एजेंसी ने आधिकारिक रूप से जिम्मेदारी स्वीकार नहीं की है।

वजीर ने कहा कि फिल्म पंजाब के उथल-पुथल भरे दौर के दौरान कथित मानवाधिकार उल्लंघनों और अवैध अंतिम संस्कारों की जांच करने वाले मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के संघर्ष को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि खालड़ा ने हजारों अज्ञात शवों के रिकॉर्ड सामने लाकर इस मुद्दे को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाया था। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐतिहासिक घटनाओं पर आधारित विभिन्न फिल्मों के साथ अलग-अलग व्यवहार क्यों किया जा रहा है। उनका कहना था कि यदि अन्य समुदायों के दर्द को दिखाने वाली फिल्मों का प्रदर्शन हो सकता है तो पंजाब के दौर और सिखों की पीड़ा को दर्शाने वाली फिल्म को भी दर्शकों तक पहुंचने का अवसर मिलना चाहिए।

वजीर ने जसवंत सिंह खालड़ा को मानवाधिकारों के लिए संघर्ष करने वाला साहसी व्यक्तित्व बताते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने गुरुद्वारा प्रबंधन समितियों से फिल्म को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने की अपील की और कहा कि इससे समाज में जागरूकता बढ़ेगी। उन्होंने केंद्र सरकार और संबंधित अधिकारियों से सभी समुदायों के ऐतिहासिक अनुभवों और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति के प्रति समान दृष्टिकोण अपनाने, पारदर्शिता बनाए रखने तथा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने की मांग की।

हिन्दुस्थान समाचार / राहुल शर्मा

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