भगवान के घर देर है अंधेर नहीं:नागरमल शास्त्री



भगवान के घर देर है अंधेर नहीं:नागरमल शास्त्री


सांबा, 15 मार्च (हि.स.)। क्षेत्र के संगवाल में चल रही श्रीमद् भागवत कथा मे नागरमल शास्त्री जी महाराज ने अपने प्रवचनों में कहा,भगवान के मथुरा आगमन,कंस वध, देवकी-वसुदेव जी को कारावास से मुक्ति एवं माता देवकी एवं भगवान श्रीकृष्ण के मिलन,कृष्ण जी द्वारा राधा जी की परीक्षा, देवकी के नाम यशोदा का संदेश,बृज वासियों,यशोदा एवं राधा की विरह वेदना का उद्धव प्रसंग के माध्यम से सुंदर चित्रण किया गया।कथा में नागरमल शास्त्री जी ने पुत्र और मां के बीच के प्रेम के बारे में बताया।इस कथा में उन्होंने बताया किस तरह भगवान जब देवकी जी से मिले और देवकी के अपार प्रेम के बाद भी वह अपनी माता यशोदा को नजरअंदाज नहीं कर पाए और भगवान असमजंस में पड़ गए कि वह अपनी दोनो माताओं में से किसके प्रति समर्पित हों। इस पर शास्त्री जी ने कहा कि यदि एक मां अपने हाथ से अपने पुत्र को खाना परोस दे तो वह पुत्र तृप्त हो जाता है।ठीक उसी तरह जिस तरह मघा नक्षत्र में पानी के बरसने से पृथ्वी तृप्त होती है।कथा के अगले संदर्भ में शास्त्री जी ने गौ दान के महत्व के बारे में वर्णन से बताया। उन्होंने बताया कि गौ दान का हमारे जीवन में क्या महत्व है। प्रत्येक प्राणी को जीवन में गौ दान जैसे पुन: कार्य अवश्य करना चाहिए। इस अवसर सभी गणमान्य लोग एवं भारी संख्या में श्रोतागण उपस्थित रहे।

हिन्दुस्थान समाचार/अमनदीप/बलवान

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