जम्मू-कश्मीर में ‘दो प्रधानमंत्री’ जैसी व्यवस्था स्वीकार नहीं: शिवसेना डोगरा फ्रंट

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जम्मू,, 03 अक्टूबर (हि.स.)।

शिवसेना डोगरा फ्रंट ने जम्मू-कश्मीर में 1953 से पहले की संवैधानिक व्यवस्था को दोबारा लागू करने से जुड़ी किसी भी कोशिश का विरोध किया है। संगठन के अध्यक्ष अशोक गुप्ता के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन करते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर के लिए अलग प्रधानमंत्री और सदर-ए-रियासत जैसी व्यवस्था उन्हें स्वीकार नहीं है।

अशोक गुप्ता ने कहा कि हाल में जम्मू-कश्मीर विधानसभा में पूर्ण राज्य के दर्जे को लेकर पारित प्रस्ताव में 26 जून 2000 और 6 नवंबर 2024 के विधानसभा प्रस्तावों का उल्लेख किया गया है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2000 के स्वायत्तता प्रस्ताव में 1953 से पहले की संवैधानिक स्थिति की बहाली की मांग की गई थी जिसमें जम्मू-कश्मीर के शासन प्रमुख के लिए वजीर-ए-आजम और सदर-ए-रियासत जैसे पुराने पदनाम भी शामिल थे।

अशोक गुप्ता ने कहा कि एक देश में दो प्रधानमंत्री की व्यवस्था नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि शिवसेना डोगरा फ्रंट जम्मू-कश्मीर के लिए अलग प्रधानमंत्री या अलग संवैधानिक प्रमुख की व्यवस्था का विरोध करता है। संगठन का कहना है कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है और यहां की संवैधानिक व्यवस्था भारत के संविधान के दायरे में ही होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को अलग संवैधानिक व्यवस्था की बहाली से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। शिवसेना डोगरा फ्रंट ने राजनीतिक दलों से यह स्पष्ट करने की मांग की कि पुराने विधानसभा प्रस्तावों का उल्लेख केवल पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने के संदर्भ में किया गया है या इसके जरिए 1953 से पहले की व्यवस्था की बहाली की भी मांग की जा रही है।

अशोक गुप्ता ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में अलग-अलग मुद्दों पर चर्चा और मतभेद हो सकते हैं लेकिन उनके संगठन के अनुसार देश की एकता, अखंडता और भारतीय संविधान की व्यवस्था सर्वोपरि रहनी चाहिए।

प्रदर्शन के दौरान राकेश, दया राम, देवक वर्मा, पृथ्वी सिंह, राजिंदर, संजीव शर्मा, पवन, अश्वनी, बंटू, प्रेम और अभिषेक सहित संगठन के कई कार्यकर्ता मौजूद रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / अश्वनी गुप्ता

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