शिवसेना की कश्मीर में हिंदू धार्मिक स्थलों पर अतिक्रमण पर श्वेत पत्र की मांग, मंदिर बिल गिरना मिलीभगत

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शिवसेना की कश्मीर में हिंदू धार्मिक स्थलों पर अतिक्रमण पर श्वेत पत्र की मांग, मंदिर बिल गिरना मिलीभगत


जम्मू, 31 मार्च (हि.स.)।

जम्मू-कश्मीर इकाई ने विधानसभा में भाजपा विधायक द्वारा पेश ‘मंदिर सुरक्षा एवं अतिक्रमण हटाओ’ निजी विधेयक को ध्वनि मत से खारिज किए जाने पर तीखा हमला बोला है। प्रदेश प्रमुख मनीष साहनी ने इसे भाजपा और सरकार की सोची-समझी मिलीभगत करार देते हुए हिंदू समाज और कश्मीरी पंडितों की आस्था के साथ खुला विश्वासघात बताया।

साहनी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में 1400 से अधिक मंदिरों और उनकी संपत्तियों पर अवैध कब्जा है जिनकी अनुमानित कीमत 25,000 करोड़ रुपये से अधिक आंकी जा रही है। 1990 के दशक में कश्मीरी पंडितों के पलायन के बाद मंदिरों और धार्मिक भूमि पर बड़े पैमाने पर अतिक्रमण हुआ लेकिन सरकारें मूकदर्शक बनी रहीं। आज सैकड़ों मंदिर अतिक्रमण की गिरफ्त में हैं या जर्जर होकर खंडहर बन चुके हैं।

भाजपा को कठघरे में खड़ा करते हुए साहनी ने कहा कि अगर पार्टी वास्तव में गंभीर होती तो केवल निजी विधेयक का दिखावा नहीं करती बल्कि ठोस सरकारी प्रस्ताव लाकर इसे कानून बनाती। उन्होंने उपमुख्यमंत्री के “मौजूदा कानून पर्याप्त हैं” वाले बयान को जमीनी हकीकत से कोसों दूर और संवेदनहीन करार दिया।

शिवसेना ने मांग की कि वक्फ कानून की तर्ज पर हिंदू धार्मिक स्थलों की सुरक्षा के लिए सख्त विशेष कानून बनाया जाए एक सशक्त और पारदर्शी मंदिर प्रबंधन बोर्ड गठित किया जाए तथा कश्मीर घाटी में मंदिरों और उनकी संपत्तियों पर हुए अतिक्रमण को लेकर तत्काल श्वेत पत्र जारी किया जाए।

साहनी ने चेतावनी दी कि यदि मंदिरों की सुरक्षा, अतिक्रमण हटाने और जीर्णोद्धार के लिए जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए तो शिवसेना सड़कों पर उतरकर सरकार और विपक्ष के दोहरे चरित्र को जनता के सामने उजागर करेगी।इस मौके पर विकास बख्शी, संजय भटट्, जसबीर सिंह उपस्थित रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / रमेश गुप्ता

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