रामबन में सुगंधित और औषधीय पौधों के व्यावसायिक उत्पादन पर संगोष्ठी का आयोजन

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रामबन, 8 जनवरी (हि.स.)। जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश में औषधीय पौधों के संरक्षण, खेती और इस क्षेत्र में उद्यमिता को बढ़ावा देने पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन आज स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग, आयुष निदेशालय और जम्मू-कश्मीर औषधीय पादप बोर्ड द्वारा रामबन जिला प्रशासन के सहयोग से किया गया।

जिले के विभिन्न हिस्सों से आए किसानों और शिक्षित बेरोजगार युवाओं ने संगोष्ठी में भाग लिया। उपायुक्त मोहम्मद अलियास खान और आयुष निदेशक डॉ. सुरेश शर्मा ने कार्यक्रम का उद्घाटन किया।

मुख्य योजना अधिकारी डॉ. शकीब अहमद, मुख्य कृषि अधिकारी विनय जंदयाल, तकनीकी अधिकारी डॉ. वाहिद-उल-हसन ने विषय पर विशेषज्ञ व्याख्यान दिए। औषधीय पादप बोर्ड के जिला नोडल अधिकारी डॉ. मसूद जरगर और आयुष विभाग के नोडल अधिकारी डॉ. परमजीत पुरी, डॉ. रमेश चंद्र और डॉ. बशीर अहमद डार सहित विशेषज्ञ उपस्थित थे।

सभा को संबोधित करते हुए उपायुक्त ने वन और गैर-वन दोनों क्षेत्रों में सुगंधित और औषधीय पौधों की खेती की आर्थिक, पारिस्थितिक और आजीविका क्षमता का दोहन करने के लिए एक संरचित, टिकाऊ और व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य रणनीति की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने संबंधित विभागों को उच्च मूल्य वाली पादप प्रजातियों के बड़े पैमाने पर प्रसार और किसानों और स्थानीय समुदायों के बीच उनकी खेती को लोकप्रिय बनाने के लिए व्यापक, क्षेत्र-विशिष्ट कार्य योजना तैयार करने का निर्देश दिया।

उन्होंने कहा कि शिक्षा और अन्य संस्थानों तथा वन क्षेत्रों में उपलब्ध भूमि का उपयोग गुणवत्तापूर्ण रोपण और प्रसार सामग्री के उत्पादन के अलावा प्रदर्शन, प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण के लिए किया जा सकता है।” व्यावहारिक अनुभव के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने सर्वोत्तम प्रथाओं को प्रदर्शित करने और किसानों को व्यावसायिक पैमाने पर खेती अपनाने के लिए प्रेरित करने हेतु कॉलेजों और स्कूलों में मॉडल हर्बल गार्डन स्थापित करने का भी आह्वान किया।

अपने संबोधन में, आयुष विभाग (जम्मू-कश्मीर) के निदेशक ने औषधीय और सुगंधित पौधों की लाभप्रदता और दीर्घकालिक क्षमता पर ज़ोर दिया। उन्होंने विभागों से प्रसंस्करण इकाइयों, मूल्यवर्धन सुविधाओं और समर्पित समूहों की स्थापना की संभावनाओं का पता लगाने का आग्रह किया, साथ ही उपलब्ध भूमि का प्रभावी ढंग से उपयोग भंडार और प्रदर्शन स्थलों के रूप में करने को कहा। उन्होंने कहा कि ऐसी पहल से कृषि समुदायों के लिए आय सृजन के अवसरों में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

निदेशक ने आगे सुझाव दिया कि समूह-आधारित ढाँचे विकसित किए जाएँ ताकि किसान सामूहिक रूप से सीख सकें, तकनीकी ज्ञान, गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री और बाज़ार संपर्क प्राप्त कर सकें, जिससे उद्यमिता को मज़बूती मिले और रामबन ज़िले में इस क्षेत्र का सतत विकास सुनिश्चित हो सके।

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हिन्दुस्थान समाचार / राधा पंडिता

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