विधायकों की सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता: उपमुख्यमंत्री

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जम्मू, 31 मार्च (हि.स.)। उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने मंगलवार को कहा कि विधायकों की सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता है और उन्होंने जम्मू-कश्मीर में हाल के सुरक्षा वापसी के फैसलों की तत्काल समीक्षा करने का आह्वान किया।

जम्मू में पत्रकारों से बात करते हुए उप मुख्यमंत्री ने कहा कि निर्वाचित प्रतिनिधियों और मुख्यधारा के राजनीतिक नेताओं को सुरक्षा प्रदान करने के लिए खतरे की धारणा ही एकमात्र आधार बनी रहनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जमीनी आकलन के बजाय विवेक से लिया गया कोई भी निर्णय जीवन को खतरे में डाल सकता है। उन्होंने उपराज्यपाल से सुरक्षा वापसी की व्यक्तिगत रूप से समीक्षा करने का आग्रह किया खासकर राजनीतिक हस्तियों पर पिछले आतंकवादी हमलों के मद्देनजर उन्होंने कहा कि पहले भी कई विधायकों को निशाना बनाया गया है और ऐसी घटनाएं सतर्क दृष्टिकोण की मांग करती हैं। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि क्षेत्र में सुरक्षा परिदृश्य को पूरी तरह से सामान्य नहीं बताया जा सकता है उन्होंने आतंकवादियों की मौजूदगी के बारे में आधिकारिक स्वीकृतियों का हवाला दिया और कहा कि इस स्तर पर सुरक्षा कम करना उचित नहीं है। उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था में एकरूपता का भी आह्वान किया और कहा कि सभी विधायकों को बिना किसी आंशिक उपचार के खतरे के मूल्यांकन स्तर के अनुसार सख्ती से सुरक्षा मिलनी चाहिए। मुख्यधारा की राजनीति में बिना किसी परिभाषित भूमिका वाले व्यक्तियों को सुरक्षा कवर दिए जाने पर चिंता जताते हुए उपमुख्यमंत्री ने ऐसे आवंटन के मानदंडों पर सवाल उठाया और पारदर्शिता और तर्कसंगतता का आह्वान किया। सदन में तीखी नोकझोंक के दौरान विधायक सज्जाद गनी लोन द्वारा की गई टिप्पणी पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए उपमुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि लोन ने आतंकवाद का शिकार होने के बावजूद इस मुद्दे को हल्के में लिया और इसका राजनीतिकरण करने का प्रयास किया।

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हिन्दुस्थान समाचार / राधा पंडिता

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