रैपिडो और कैब सेवाओं से प्रभावित हो रहा पेट्रोल ऑटो कारोबार

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जम्मू,, 10 मई (हि.स.)।

जम्मू शहर में तेजी से बढ़ती ऑनलाइन कैब और बाइक टैक्सी सेवाओं ने जहां लोगों की यात्रा को आसान बनाया है वहीं पारंपरिक पेट्रोल ऑटो चालकों के सामने बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। रैपिडो, ओला और उबर जैसी ऐप आधारित सेवाओं के विस्तार के बाद ऑटो चालकों का कारोबार लगातार प्रभावित हो रहा है। पहले जिन स्टैंडों पर यात्रियों की लंबी कतारें दिखाई देती थीं, वहां अब ऑटो चालक घंटों सवारी का इंतजार करते नजर आते हैं।

दरअसल डिजिटल प्लेटफॉर्म आधारित सेवाओं ने लोगों को घर बैठे कम किराए और आसान बुकिंग की सुविधा दी है। यात्री अब मोबाइल ऐप के जरिए कुछ ही मिनटों में बाइक टैक्सी या कैब बुला लेते हैं। इससे पारंपरिक ऑटो सेवाओं की मांग में तेजी से गिरावट आई है। खासकर पेट्रोल ऑटो चालकों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ा है क्योंकि बढ़ते ईंधन दामों के बीच उनकी कमाई लगातार घटती जा रही है।

ऑटो चालकों का कहना है कि पहले दिनभर में जितनी आमदनी हो जाती थी अब उसका आधा भी मुश्किल से हो पाता है। कई चालक बैंक लोन या किस्तों पर ऑटो खरीद चुके हैं और घटती कमाई के कारण उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। दूसरी ओर ऐप आधारित सेवाओं में किराया पहले से तय होने और डिजिटल भुगतान की सुविधा के कारण यात्री भी इन्हें ज्यादा पसंद कर रहे हैं।

एक बड़ी समस्या यह भी है कि पारंपरिक ऑटो चालकों के पास तकनीकी और डिजिटल प्लेटफॉर्म तक सीमित पहुंच है। अधिकांश छोटे चालक ऐप आधारित व्यवस्था में शामिल नहीं हो पा रहे जिसके कारण प्रतिस्पर्धा में पीछे छूटते जा रहे हैं। वहीं कई शहरों में बाइक टैक्सी सेवाओं को लेकर नियम और परमिट व्यवस्था भी स्पष्ट नहीं है जिससे ऑटो यूनियनों में नाराजगी बढ़ रही है।

हालांकि यह भी सच है कि तकनीक और आधुनिक सेवाओं को पूरी तरह रोका नहीं जा सकता। समय के साथ परिवहन व्यवस्था बदल रही है और लोगों की प्राथमिकताएं भी बदल रही हैं। ऐसे में जरूरत इस बात की है कि सरकार और परिवहन विभाग पारंपरिक ऑटो चालकों के हितों की सुरक्षा के लिए ठोस नीति तैयार करें। उन्हें डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने, ईंधन पर राहत देने और वैकल्पिक रोजगार सहायता जैसी योजनाओं पर काम करने की आवश्यकता है।

यदि समय रहते संतुलन नहीं बनाया गया तो आने वाले वर्षों में हजारों ऑटो चालक आर्थिक संकट की चपेट में आ सकते हैं। तकनीक और रोजगार के बीच संतुलन बनाना आज की सबसे बड़ी जरूरत बन चुकी है।

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हिन्दुस्थान समाचार / अश्वनी गुप्ता

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