राणा ने कश्मीर डिवीजन में समावेशी विकास एजेंडा को आकार देने के लिए आदिवासी मुद्दों को शामिल किया
श्रीनगर, 06 जनवरी (हि.स.)। सहभागी और समावेशी शासन के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाते हुए एक महत्वपूर्ण पहल के तहत जल शक्ति, वन पारिस्थितिकी एवं पर्यावरण और जनजातीय मामलों के मंत्री जावेद अहमद राणा ने श्रीनगर में कश्मीर डिवीजन के आदिवासी समुदायों के प्रख्यात व्यक्तियों के साथ एक उच्च स्तरीय संवादात्मक सत्र की अध्यक्षता की।
दिन भर चले इस संवाद में आदिवासी कलाकारों, लेखकों, कवियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, संरक्षणवादियों, जन प्रतिनिधियों और सामुदायिक नेताओं का एक प्रतिष्ठित समूह एकत्रित हुआ, जिसने सरकार और जमीनी स्तर की आवाजों के बीच सीधे संवाद के लिए एक सार्थक मंच प्रदान किया। सत्र का उद्देश्य आदिवासी कल्याण के लिए सरकार की नीतियों और कार्यक्रमों को परिष्कृत करने हेतु वास्तविक अनुभवों और सुझावों को जानना था। सभा को संबोधित करते हुए मंत्री जावेद अहमद राणा ने इस संवाद को एक नियमित बैठक के बजाय एक सहयोगात्मक प्रयास बताया और इस बात पर जोर दिया कि वास्तविक आदिवासी उत्थान को स्वयं समुदायों की आकांक्षाओं और वास्तविकताओं के आधार पर ही आकार दिया जाना चाहिए। मंत्री ने कहा कि यह संवाद आदिवासियों के समावेशन, सशक्तिकरण और गरिमा के प्रति हमारी साझा जिम्मेदारी को दर्शाता है। विकास तभी सतत हो सकता है जब वह उन लोगों की आवाजों से निर्देशित हो जिनकी सेवा करना उसका लक्ष्य है।
राणा ने कहा कि यह दृष्टिकोण सहयोगात्मक शासन को बढ़ावा देता है, जहां नीति का उद्देश्य जमीनी हकीकतों के अनुरूप होता है। जब सामुदायिक ज्ञान और प्रशासनिक कार्रवाई साथ-साथ चलती हैं, तो जन कल्याण के परिणाम सार्थक और स्थायी बनते हैं। मंत्री ने लेखकों, कलाकारों, कवियों और नागरिक समाज के नेताओं से आदिवासी और अन्य कमजोर समुदायों के कल्याण के लिए पहल करने का आग्रह किया, यह देखते हुए कि उनका सांस्कृतिक और सामाजिक प्रभाव उन्हें समाज का मार्गदर्शन और उसे संगठित करने की अनूठी स्थिति में रखता है। उत्तरदायी शासन की परिकल्पना पर जोर देते हुए उन्होंने प्रतिभागियों को आश्वासन दिया कि साझा की गई अंतर्दृष्टि भविष्य के नीतिगत ढांचों को सीधे प्रभावित करेगी। मंत्री ने आदिवासी कल्याण के लिए कार्यान्वित की जा रही प्रमुख योजनाओं की रूपरेखा प्रस्तुत की, जिनमें पूंजीगत व्यय बजट, जनजातीय उप-योजना के लिए विशेष केंद्रीय सहायता (एससीए टू टीएसएस), प्रधानमंत्री आदि आदर्श ग्राम योजना (पीएमएजीवाई), धरती आभा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान (डीए-जेजीयूए) और प्रधानमंत्री वन धन योजना (पीएमवीडीवाई) शामिल हैं। सत्र का समापन साझा संकल्प और आशावाद के साथ हुआ, जो विश्वास को मजबूत करने, समावेशी शासन सुनिश्चित करने और जम्मू-कश्मीर के विकास में आदिवासी समुदायों को समान भागीदार के रूप में सशक्त बनाने के सामूहिक लक्ष्य को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
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हिन्दुस्थान समाचार / सचिन खजूरिया

