जम्मू यूनिवर्सिटी के 50 करोड़ रुपये बडगाम कैंपस के लिए देने के कथित फैसले पर विरोध
जम्मू, 28 अक्टूबर (हि.स.)।
जम्मू यूनिवर्सिटी के फंड से 50 करोड़ रुपये कश्मीर के बडगाम में कैंपस स्थापित करने के लिए आवंटित किए जाने के कथित फैसले को लेकर विरोध शुरू हो गया है।
प्रदर्शनकारियों में शामिल यूथ कांग्रेस नेता जय सिद्ध भल्ला ने इस फैसले पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे जम्मू यूनिवर्सिटी और उसके छात्रों के हितों के खिलाफ बताया है। उनका आरोप है कि यह फैसला कश्मीर और जम्मू विश्वविद्यालय अधिनियम 1969 के प्रावधानों का उल्लंघन हो सकता है। प्रदर्शनकारियों ने पूरे मामले की पारदर्शी जांच करवाने और फंड के आवंटन का कानूनी आधार स्पष्ट करने की मांग की है।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि एक तरफ जम्मू यूनिवर्सिटी पहले से ही आर्थिक परेशानियों का सामना कर रही है वहीं दूसरी तरफ इतनी बड़ी रकम जम्मू से बाहर कैंपस स्थापित करने के लिए इस्तेमाल किए जाने का फैसला कई सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले छात्रों को पहले से ही बढ़ी हुई फीस, बुनियादी सुविधाओं की कमी, हॉस्टल की समस्याओं और अन्य शैक्षणिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में विश्वविद्यालय के फंड का इस्तेमाल सबसे पहले छात्रों की जरूरतों और यूनिवर्सिटी की सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए किया जाना चाहिए।
प्रदर्शनकारियों ने सवाल उठाया कि जब जम्मू यूनिवर्सिटी में ही कई जरूरी सुविधाओं को बेहतर बनाने की आवश्यकता है तो इतनी बड़ी रकम दूसरे स्थान पर कैंपस स्थापित करने के लिए क्यों आवंटित की जा रही है। उनका कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन को इस फैसले के पीछे की वजह और फंड के इस्तेमाल से जुड़ी पूरी जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए ताकि छात्रों और आम लोगों के सामने स्थिति स्पष्ट हो सके।
प्रदर्शनकारियों ने कश्मीर और जम्मू विश्वविद्यालय अधिनियम, 1969 का हवाला देते हुए मांग की कि यह स्पष्ट किया जाए कि 50 करोड़ रुपये के कथित आवंटन का कानूनी आधार क्या है और क्या इस फैसले में सभी जरूरी नियमों का पालन किया गया है। उन्होंने कहा कि अगर जांच में किसी तरह की कानूनी अनियमितता सामने आती है तो उसके लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
प्रदर्शनकारियों ने साफ किया कि उनकी मांग विश्वविद्यालय के फंड का पारदर्शी और कानूनी तरीके से इस्तेमाल सुनिश्चित करने की है। उनका कहना है कि जम्मू यूनिवर्सिटी की धनराशि का उपयोग कानून के अनुसार और छात्रों तथा संस्थान के हितों को ध्यान में रखते हुए किया जाना चाहिए।
फिलहाल 50 करोड़ रुपये के कथित फंड आवंटन को लेकर उठाए गए आरोपों और मांगों पर विश्वविद्यालय प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है। वास्तविक आवंटन, उसकी शर्तों और कानूनी वैधता की पुष्टि संबंधित आधिकारिक दस्तावेजों से ही हो सकेगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / अश्वनी गुप्ता

