राष्ट्रविरोधी और गैरकानूनी गतिविधियों के मामले में फरार तीन आरोपियों के खिलाफ उद्घोषणा आदेश जारी
श्रीनगर, 13 जनवरी (हि.स.)। एक महत्वपूर्ण और निर्णायक सफलता हासिल करते हुए काउंटर इंटेलिजेंस कश्मीर (सीआईके) ने आज एक गंभीर राष्ट्रविरोधी और गैरकानूनी गतिविधियों के मामले में फरार तीन आरोपियों के खिलाफ उद्घोषणा आदेश जारी किए।
एजेंसी के बयान के अनुसार उद्घोषणा की कार्यवाही श्रीनगर स्थित राष्ट्रीय सूचना अधिनियम के तहत नामित विशेष न्यायाधीश की माननीय अदालत द्वारा जारी आदेशों के अनुपालन में की गई। यह कार्यवाही श्रीनगर और कुपवाडा जिलों के अधिकार क्षेत्र में आने वाले क्षेत्रों में एफआईआर संख्या 07/2020 के संबंध में की गई जो आईपीसी की धारा 153-ए और 505 तथा गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम की धारा 13 के तहत सीआईके पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई थी। फरमान आरोपियों में मुबीन अहमद शाह पुत्र स्वर्गीय अली मोहम्मद शाह निवासी बुचवारा जिला श्रीनगर; अजीज-उल-हसन अशै उर्फ टोनी अशै पुत्र नजीर अहमद अशै निवासी डॉक वाली कॉलोनी,जवाहर नगर जिला श्रीनगर और रिफत वानी पुत्री गुलाम मोहम्मद वानी निवासी त्रेहगाम जिला कुपवाड़ा शामिल हैं।
बयान के अनुसार यह मामला सार्वजनिक व्यवस्था, सांप्रदायिक सद्भाव और राष्ट्रीय अखंडता के लिए गंभीर और घातक अपराधों से संबंधित है। जांच से स्पष्ट रूप से पता चला है कि यह कश्मीर के भीतर और बाहर से सक्रिय अलगाववादी ताकतों के इशारे पर काम करने वाले बेईमान असामाजिक और राष्ट्रविरोधी तत्वों द्वारा रची गई एक सुनियोजित साजिश थी।
जांच के दौरान यह बात सामने आई है कि आरोपियों ने जानबूझकर पत्रकारों, फ्रीलांसरों और समाचार पोर्टलों का रूप धारण किया जबकि वास्तव में वे एक गुप्त डिजिटल युद्ध अभियान चला रहे थे। बयान में कहा गया है कि फेसबुक, एक्स (पूर्व में ट्विटर) और व्हाट्सएप जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों का दुरुपयोग करते हुए उन्होंने व्यवस्थित रूप से फर्जी, प्रेरित, अतिरंजित, अलगाववादी और संदर्भ से परे सामग्री बनाई और फैलाई। इस अभियान का सुनियोजित उद्देश्य सड़क हिंसा भड़काना, सामान्य नागरिक जीवन को बाधित करना, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना, सार्वजनिक व्यवस्था को बिगाड़ना और जन अशांति फैलाना था जिससे राष्ट्र-विरोधी भावनाएं भड़काई जा सकें और भारत संघ के खिलाफ असंतोष पैदा करने का प्रयास किया जा सके।
एक बयान में सीआईके ने दोहराया है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का दुरुपयोग राष्ट्र के खिलाफ हथियार के रूप में नहीं किया जा सकता। कोई भी व्यक्ति या समूह जो पत्रकारिता या ऑनलाइन सक्रियता की आड़ में गैरकानूनी, अलगाववादी या सांप्रदायिक गतिविधियों को छिपाने का प्रयास करेगा, उसके खिलाफ त्वरित, कठोर और कानूनी रूप से मजबूत कार्रवाई की जाएगी।
माननीय न्यायालय के उद्घोषणा आदेश में निर्दिष्ट है- “यह अधिसूचित किया जाता है कि यदि फरार आरोपी निर्धारित समय के भीतर माननीय न्यायालय के समक्ष उपस्थित होने में विफल रहते हैं तो उनकी चल और अचल संपत्तियों को कानून के अनुसार सख्ती से कुर्क कर लिया जाएगा।”
सीआईके के बयान में कहा गया है कि जो लोग डिजिटल प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग करके नफरत, गलत सूचना, सांप्रदायिक असामंजस्य या राष्ट्रविरोधी प्रचार फैलाते हैं, उन पर लगातार नजर रखी जा रही है। कानून ऐसे हर अपराधी तक पहुंचेगा, कोई बच नहीं पाएगा, कोई छूट नहीं मिलेगी और राष्ट्र की शांति, एकता और संप्रभुता को खतरे में डालने वाले कृत्यों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
हिन्दुस्थान समाचार / बलवान सिंह

