डिजिटल अरेस्ट साइबर धोखाधड़ी मामले के तहत 16,86,465 की अपराध आय अस्थायी रूप से जब्त

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श्रीनगर, 23 मार्च (हि.स.)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), श्रीनगर क्षेत्रीय कार्यालय ने प्रतिरूपण और जबरदस्ती से जुड़े एक डिजिटल अरेस्ट साइबर धोखाधड़ी मामले में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत 16,86,465 की अपराध आय को अस्थायी रूप से जब्त कर लिया है।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), श्रीनगर क्षेत्रीय कार्यालय ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत 16,86,465 की अपराध आय को अस्थायी रूप से जब्त कर लिया है। जब्त की गई राशि एचडीएफसी बैंक, करोल बाग, नई दिल्ली में मेसर्स जीविका फाउंडेशन के नाम से संचालित एक बैंक खाते में है। उक्त खाता आरोपी गौरव कुमार पुत्र जयपाल सिंह द्वारा संचालित किया जाता है जो एक सुनियोजित डिजिटल अरेस्ट साइबर धोखाधड़ी रैकेट में संलिप्त पाया गया है।

बयान में कहा गया है कि ईडी ने कश्मीर जोन के साइबर पुलिस स्टेशन द्वारा दिनांक 19.10.2024 को दर्ज एफआईआर संख्या 26/2024 और श्रीनगर के माननीय मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में दायर प्रारंभिक आरोपपत्र के आधार पर जांच शुरू की। यह जांच साइबर धोखाधड़ी से संबंधित है जिसमें कानून प्रवर्तन और नियामक एजेंसियों के अधिकारियों का रूप धारण करके निर्दोष नागरिकों को धोखा दिया गया। जांच में पता चला कि आरोपी गौरव कुमार, गुरप्रीत सिंह और उज्ज्वल चौहान ने अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर टीआरएआई और सीबीआई जैसी एजेंसियों के अधिकारियों का रूप धारण करके सुनियोजित धोखाधड़ी को अंजाम दिया।

बयान में आगे कहा गया है कि पीड़ित को झूठी सूचना दी गई कि वह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में शामिल है और उसे गिरफ्तारी की धमकी दी गई। भय, दबाव और मनोवैज्ञानिक दबाव के तहत पीड़ित को अपनी सावधि जमा राशि निकालने और धनराशि स्थानांतरित करने के लिए मजबूर किया गया। तदनुसार पीड़ित से धोखाधड़ी करके 21,00,000/- रुपये प्राप्त किए गए और मेसर्स जीविका फाउंडेशन के बैंक खाते में स्थानांतरित किए गए जिसने प्राथमिक लाभार्थी और मध्यस्थ खाते के रूप में कार्य किया। धोखाधड़ी से प्राप्त कुल राशि में से माननीय मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, श्रीनगर के न्यायालय द्वारा दिनांक 28.09.2024 को पारित आदेश के अनुसार शिकायतकर्ता को 4,13,535/- रुपये पहले ही वापस कर दिए गए हैं। हालांकि शेष 16,86,465/- रुपये की राशि जो मेसर्स जीविका फाउंडेशन के बैंक खाते में पहचानी और पता लगाई जा सकती है, पीएमएलए, 2002 के प्रावधानों के तहत अपराध की आय है। इसके अतिरिक्त उक्त राशि को पीएमएलए, 2002 की धारा 5(1) के तहत अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया गया है। आगे की जांच जारी है।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुमन लता

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