वैश्विक संघर्षों के बीच राष्ट्रीय हित सर्वोपरि होना चाहिए: पवन शर्मा

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वैश्विक संघर्षों के बीच राष्ट्रीय हित सर्वोपरि होना चाहिए: पवन शर्मा


जम्मू, 02 मार्च (हि.स.)।

ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे देशों के बीच तनाव और युद्ध जैसी स्थितियों के दौरान समाज के कुछ वर्गों में देखी गई प्रतिक्रियाओं, बयानबाजी और स्पष्ट वैचारिक ध्रुवीकरण के बीच भाजपा जम्मू-कश्मीर के राज्य सचिव पवन शर्मा ने इस बात पर जोर दिया है कि भारत की प्राथमिकताएं हमेशा उसके अपने राष्ट्रीय हित से निर्देशित होनी चाहिए न कि बाहरी संघर्षों के साथ भावनात्मक जुड़ाव से।

भारत एक संप्रभु और आत्मविश्वासी सभ्यता-राज्य है।जिसकी स्वतंत्र निर्णय लेने की गौरवशाली विरासत है। हमारी विदेश नीति ऐतिहासिक रूप से रणनीतिक स्वायत्तता, संतुलन और दीर्घकालिक राष्ट्रीय उद्देश्यों की स्पष्ट समझ से आकार लेती रही है। गुटनिरपेक्षता के युग से लेकर आज के बहु-संरेखित जुड़ाव तक भारत ने वैश्विक जटिलताओं से निपटने में परिपक्वता और विवेक का प्रदर्शन किया है। अपने रुख को दोहराते हुए पवन शर्मा ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय संघर्षों को भारत के भीतर वैचारिक विभाजन का कारण नहीं बनना चाहिए। देश के भीतर गुट बनाना—चाहे विदेशी शक्तियों के पक्ष में हो या विपक्ष में—भारत को मजबूत नहीं बनाता। यह हमारी आंतरिक एकता को कमजोर करता है और हमें हमारी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं से भटकाता है उन्होंने टिप्पणी की।

भारत की ताकत उसकी विविधता, संवैधानिक ढांचा और सभ्यतागत ज्ञान में निहित है। हर वैश्विक घटनाक्रम का आकलन भारत की सुरक्षा, आर्थिक स्थिरता, ऊर्जा हितों, प्रवासी भारतीयों के कल्याण और क्षेत्रीय शांति के परिप्रेक्ष्य से किया जाना चाहिए—न कि भावनात्मक या वैचारिक आवेगों के आधार पर। पवन शर्मा के अनुसार भारत की विदेश नीति रणनीतिक स्वायत्तता और संप्रभु निर्णय को दर्शाती है। “भारत किसी भी शक्ति गुट का उपग्रह नहीं है। हमारे निर्णय हमारे अपने संविधान, हमारी अपनी सभ्यता और हमारे अपने राष्ट्रीय हितों पर आधारित हैं,” उन्होंने जोर देकर कहा। उन्होंने नागरिकों, बुद्धिजीवियों और विचारकों से सार्वजनिक चर्चा में संतुलन और जिम्मेदारी बनाए रखने की अपील की। स्वस्थ बहस लोकतंत्र का सार है लेकिन बाहरी भू-राजनीतिक संघर्षों पर भावनात्मक ध्रुवीकरण चिंता का विषय है।

अपने संबोधन का समापन करते हुए पवन शर्मा ने कहा, “राष्ट्र सर्वोपरि है। राष्ट्रीय हित ही हमारा सर्वोपरि मानदंड होना चाहिए। भारत किसी की नकल नहीं है। भारत अपनी शक्ति के बल पर गौरवान्वित है और देश में हमारी एकता विदेशों में हमारी विश्वसनीयता को मजबूत करती है।

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हिन्दुस्थान समाचार / रमेश गुप्ता

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