होली पर नटरंग का अनूठा सांस्कृतिक उत्सव, दिखी जम्मू-कश्मीर की विविध लोक परंपराओं की जीवंत छटा

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होली पर नटरंग का अनूठा सांस्कृतिक उत्सव, दिखी जम्मू-कश्मीर की विविध लोक परंपराओं की जीवंत छटा


जम्मू, 03 मार्च (हि.स.)। होली के पावन अवसर पर जम्मू की प्रतिष्ठित सांस्कृतिक संस्था नटरंग ने एक अभिनव और रचनात्मक प्रस्तुति के माध्यम से जम्मू-कश्मीर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को मंच पर साकार किया। पारंपरिक रंगों की होली से अलग हटकर इस बार नटरंग ने “सांस्कृतिक रंगों” के माध्यम से प्रदेश की विविध लोक परंपराओं को दर्शकों के सामने प्रस्तुत किया।

यह अनूठी अवधारणा होली को एक भव्य सांस्कृतिक संगम में बदलने वाली साबित हुई। रंगों की भौतिक छटा के स्थान पर दर्शकों ने विरासत के प्रतीकात्मक रंगों को संगीत, नृत्य, पारंपरिक वेशभूषा और लोक लयों के माध्यम से अनुभव किया। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि जम्मू-कश्मीर की वास्तविक पहचान उसकी बहुलतावादी संस्कृति और सदियों पुरानी परंपराओं में निहित है।

नटरंग के संस्थापक एवं पद्मश्री सम्मानित बलवंत ठाकुर ने इस अवसर पर कहा कि विश्व में विरले ही ऐसे उदाहरण मिलते हैं जहाँ इतनी विविध सांस्कृतिक परंपराएँ सौहार्दपूर्वक साथ-साथ फलती-फूलती हों। उन्होंने कहा कि होली जैसे उल्लास और एकता के पर्व पर इस सांस्कृतिक धरोहर को प्रस्तुत करना विशेष रूप से सार्थक है।

प्रस्तुति में कश्मीरी, डोगरी, गोजरी, पहाड़ी और भद्रवाही लोकनृत्यों की मनमोहक झलक दिखाई गई। कश्मीरी नृत्य की कोमलता, डोगरी लोकनृत्य की ऊर्जा, गोजरी और पहाड़ी अंचल की सादगी तथा भद्रवाही शैली की दुर्लभ अभिव्यक्ति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस अभिनव आयोजन के माध्यम से नटरंग ने एक बार फिर यह सिद्ध किया कि होली के सच्चे रंग वही हैं जो विविधता में एकता का संदेश देते हैं।

हिन्दुस्थान समाचार / राहुल शर्मा

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