मीरवाइज उमर फारूक ने दिवंगत आयतुल्लाह सैयद अली खामेनेई को की भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित, उन्हें एक महान धार्मिकऔर राजनीतिक व्यक्तित्व बताया
बडगाम, 09 जुलाई (हि.स.)। मुतहिदा मजलिस-ए-उलेमा (एमएमयू) के प्रमुख और कश्मीर के मीरवाइज डॉ. मौलवी मोहम्मद उमर फारूक ने बडगाम में आगा सैयद हसन अल-मूसावी अल-सफावी के नेतृत्व वाली अंजुमन-ए-शरी शियान द्वारा आयोजित एक स्मृति सभा में दिवंगत आयतुल्लाह सैयद अली खामेनेई को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्हें एक महान धार्मिक और राजनीतिक व्यक्तित्व बताया।
मीरवाइज ने कहा कि आयतुल्लाह खामेनेई के जीवन में विश्वभर के मुसलमानों के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश है, आस्था केवल व्यक्तिगत पूजा तक सीमित नहीं है बल्कि न्याय के लिए खड़े होने, मानवीय गरिमा की रक्षा करने, पीड़ितों के लिए आवाज उठाने और बुद्धिमत्ता और साहस के साथ अन्याय का विरोध करने की भी मांग करती है।
उन्होंने कहा कि आयतुल्लाह खामेनेई को सबसे बड़ी श्रद्धांजलि मुस्लिम एकता के उद्देश्य को कायम रखना होगा। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में जब उम्माह विभाजन, संघर्ष और बाहरी दबावों का सामना कर रही है। उनका संदेश हमें याद दिलाता है कि शिया और सुन्नी मत और विचारों में मतभेदों के बावजूद एक ही उम्माह का हिस्सा हैं, एक ही कुरान, एक ही पैगंबर (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) और एक ही किबला के साथ।
परमाणु हथियारों पर अयातुल्ला खामेनेई के सैद्धांतिक रुख का जिक्र करते हुए मीरवाइज ने कहा कि बार-बार धमकियों और दबावों का सामना करने के बावजूद उन्होंने परमाणु हथियारों के अधिग्रहण और उपयोग का विरोध किया क्योंकि वे उन्हें इस्लामी शिक्षाओं के विपरीत और मानवता के विरुद्ध मानते थे। उन्होंने कहा कि यह नैतिक रुख ऐसे युग में महत्वपूर्ण है जहां विनाशकारी शक्ति को अक्सर ताकत समझ लिया जाता है जबकि सच्ची ताकत न्याय, संयम और जिम्मेदारी में निहित है।
मीरवाइज ने फिलिस्तीनी लोगों और उनके सम्मान, न्याय और स्वतंत्रता के अधिकार के लिए अयातुल्ला खामेनेई के निरंतर समर्थन को भी याद किया।
उन्होंने कहा कि फिलिस्तीन का दुख दुनिया की अंतरात्मा पर एक घाव बना हुआ है और मुस्लिम उम्माह और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नैतिक जिम्मेदारी की परीक्षा है। लंबे समय से अनिश्चितता और अन्याय का सामना कर रहे लोगों की स्थिति का जिक्र करते हुए मीरवाइज ने कहा कि दुनिया भर में उत्पीड़ित लोग एकता, धैर्य, नैतिक स्पष्टता और सामूहिक संकल्प से शक्ति प्राप्त करते हैं। उन्होंने कहा कि विभाजन से गरिमा प्राप्त नहीं की जा सकती और न्याय की तलाश करने वाले समुदायों को एकजुट, अनुशासित और विवेकपूर्ण रहना चाहिए।
मीरवाइज ने दिवंगत नेता के लिए प्रार्थना की और कहा कि उनकी विरासत मुसलमानों को सांप्रदायिकता को त्यागने, भाईचारे को मजबूत करने, उत्पीड़ितों के साथ खड़े होने और न्याय, शांति और एकता के लिए काम करने के लिए प्रेरित करे।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुमन लता

