महबूबा मुफ्ती ने जम्मू-कश्मीर में वक्फ प्रशासन को निर्वाचित सरकार को सौंपने की मांग की
श्रीनगर, 13 अक्टूबर (हि.स.)। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने जम्मू-कश्मीर में वक्फ प्रशासन को निर्वाचित सरकार को सौंपने की मांग की है और अधिकारियों से आग्रह किया है कि वे मीरवाइज उमर फारूक के नेतृत्व वाली मुत्तहिदा मजलिस-ए-उलेमा (एमएमयू) को मस्जिदों में दिए जाने वाले उपदेशों की समीक्षा करने की अनुमति दें।
कश्मीर की सभी मस्जिदों में एक समान उपदेश लागू करने के वक्फ बोर्ड के कदम पर प्रतिक्रिया देते हुए महबूबा ने कहा कि उनकी पार्टी इस निर्देश का कड़ा विरोध करती है और इसे धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप और धार्मिक संस्थानों और मौलवियों को नियंत्रित करने का प्रयास बताती है।
एक्स पर एक पोस्ट में उन्होंने कहा कि यह कदम अस्वीकार्य है और दोहराया कि पीडीपी ने इसी तरह के कारणों से वक्फ संशोधन विधेयक का विरोध किया था।
उन्होंने कहा कि धर्म को थोपा नहीं जा सकता न ही धार्मिक संस्थानों को मनमाने नियंत्रण के अधीन किया जा सकता है। महबूबा ने कहा कि इन आदेशों से धार्मिक स्वतंत्रता और मुस्लिम संस्थानों की स्वायत्तता पर गंभीर चिंताएं पैदा होती हैं खासकर तब जब उनके अनुसार मुसलमानों को उनकी वक्फ संपत्तियों से संबंधित निर्णयों से बाहर रखा जा रहा है और मस्जिदों पर हमले हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि यदि सरकार आगे बढ़ने पर अड़ी है तो उसे पहले जम्मू-कश्मीर में वक्फ संपत्तियों का प्रशासन निर्वाचित सरकार को सौंपना होगा और कश्मीर के मीरवाइज की अध्यक्षता वाली मुत्तहिदा मजलिस-ए-उलेमा (एमएमयू) को उपदेशों की जांच करने की अनुमति देनी होगी।
धार्मिक स्वतंत्रता के संवैधानिक संरक्षण पर जोर देते हुए पीडीपी अध्यक्ष ने कहा कि यह एक अधिकार है न कि कोई विशेषाधिकार जिसे सत्ता में बैठे लोग दे या छीन सकते हैं। यह विवाद वक्फ बोर्ड द्वारा प्रस्तावित एकसमान उपदेशों और जम्मू-कश्मीर में धार्मिक संस्थानों पर उसके अधिकार क्षेत्र को लेकर चिंताओं के बीच आया है।
महबूबा की टिप्पणियों से वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन, धार्मिक स्वायत्तता और उनके प्रशासन में निर्वाचित प्रतिनिधियों की भूमिका को लेकर चल रही बहस में और इजाफा हुआ है।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुमन लता

