मैं वापस आऊंगा’ का श्रीनगर में प्रीमियर, फिल्म हस्तियों ने कश्मीर में सिनेमा की वापसी की तारीफ की

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श्रीनगर, 09 सितंबर (हि.स.)।

कश्मीर में सिनेमा की वापसी हुई है। 'मैं वापस आऊंगा' फिल्म का प्रीमियर आईएनओएक्स श्रीनगर में जम्मू-कश्मीर के पहले इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (आईएफएफजेके) के दौरान होने जा रहा है। इस मौके पर जानी-मानी फिल्म हस्तियों ने घाटी की शानदार कहानी कहने की परंपरा, जीवंत संगीत संस्कृति और फिल्म निर्माताओं व कलाकारों के लिए नए मौकों पर बात की।

श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस सेंटर में एक जॉइंट मीडिया बातचीत के दौरान प्लेबैक सिंगर सुनिधि चौहान, फिल्ममेकर इम्तियाज अली, एक्टर-प्रोड्यूसर संजय सूरी, एक्टर वेदांग रैना और एक्ट्रेस शरवरी ने कश्मीर के साथ अपने जुड़ाव और यहां की कहानियों को पर्दे पर लाने की अहमियत पर चर्चा की।

संजय सूरी ने कहा कि दशकों बाद ऐसा माहौल लौटना कश्मीर और फिल्म इंडस्ट्री दोनों के लिए बहुत अहम है। सूरी ने कहा, 25-30 साल बाद ऐसा माहौल फिर से देखना बहुत खास है। फिल्ममेकर भी कह रहे हैं कि यह ऐसी जगह है जहां लोगों ने फिर से फिल्में बनाना शुरू कर दिया है।

कश्मीर में सिनेमा के साथ अपने जुड़ाव को याद करते हुए उन्होंने कहा कि सिनेमा दूसरी दुनिया की एक खिड़की है। कश्मीर में बहुत सारी कहानियां हैं। जब तक लोग यहां आकर इन कहानियों से जुड़ते नहीं, तब तक उन्हें बताया नहीं जा सकता। सूरी ने कश्मीर के फिल्म इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए बेहतर जागरूकता, मार्केटिंग और संस्थागत सहयोग की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह एक शुरुआत है। अगर वर्कशॉप आयोजित की जाएं और यहां कोई फिल्म स्कूल खुले तो यह युवाओं के लिए बहुत अच्छा होगा। उन्होंने यह भी कहा कि कश्मीर में हमेशा से एंटरप्रेन्योरशिप (उद्यमिता) की भावना रही है।

एक्टर वेदांग रैना ने कहा कि कश्मीर उनके दिल के बहुत करीब है क्योंकि उनका परिवार रैनावाड़ी से है। उन्होंने कहा कि मैंने कश्मीर को उतना नहीं देखा है जितना मैं देखना चाहता था। कश्मीर हमेशा मेरा घर रहेगा। मेरा परिवार रैनावाड़ी से है। मैं थोड़ी-बहुत कश्मीरी समझ सकता हूं लेकिन ज्यादा बोल नहीं पाता। यहां आकर बहुत अच्छा लग रहा है।

सुनिधि चौहान जिनकी आवाज मशहूर गाने 'बुमरो बुमरो' से जुड़ी है ने कहा कि वह खुद को खुशकिस्मत मानती हैं कि वह इस गाने का हिस्सा बनीं। उन्होंने कहा कि यह कहानी ही कुछ ऐसी है कि अपनी एक अलग जगह बनाती है और सब कुछ वहीं से आता है। मैं खुद को खुशकिस्मत मानती हूँ कि मुझे ‘बुमरो बुमरो’ गाने का मौका मिला। गाने के साथ अपने अनुभव को याद करते हुए चौहान ने बताया कि उन्होंने इसके लिए भाषा सीखी थी और लंबे समय से कश्मीर घूमने का सपना देख रही थीं। उन्होंने कहा कि मेरा हमेशा से कश्मीर आने का सपना था और इतने सालों बाद आखिरकार मुझे यह मौका मिला। यहाँ आने के बाद मुझे इस जगह की ताकत का एहसास हुआ। कश्मीर को “बहुत गहरा” बताते हुए गायिका ने कहा कि वह यहाँ दोबारा आना पसंद करेंगी।

हिन्दुस्थान समाचार / बलवान सिंह

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