उपराज्यपाल ने कश्मीर विश्वविद्यालय के 21वें दीक्षांत समारोह को संबोधित किया

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श्रीनगर, 26 फ़रवरी (हि.स.)।

उपराज्यपाल ने विश्वविद्यालयों से ज्ञान के संरक्षक के रूप में अपनी पारंपरिक भूमिका से आगे बढ़कर नवाचार, मानव विकास और सामाजिक परिवर्तन के जीवंत केंद्रों के रूप में विकसित होने का आह्वान किया।

उपराज्यपाल सिन्हा ने कहा कि कक्षा में दिए गए विचारों का दुनिया पर प्रभाव पड़ना चाहिए।

उपराज्यपाल सिन्हा ने कहा, मेरा मंत्र है कि उद्योग और बुद्धि का साथ-साथ विकास होना चाहिए। हमारे विश्वविद्यालयों को उद्योग, नवोन्मेषकों, अनुसंधान और विकास संगठनों के साथ मिलकर विकसित भारत का निर्माण करना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उच्च शिक्षा परिसर और कंपनियां भविष्य का सह-निर्माण करें। उपराज्यपाल ने कहा, एक उद्देश्य। एक प्राथमिकता - देश सर्वोपरि। हमेशा याद रखें, जब आप देश का निर्माण करते हैं।तो देश आपका भी निर्माण करता है। राष्ट्र केवल संसाधनों से नहीं उठते। वे शिक्षित लोगों से उठते हैं और जब राष्ट्र उठता है तो आप भी उठते हैं। उपराज्यपाल ने स्नातक छात्रों को संबोधित किया।

आज प्रौद्योगिकी अत्यंत तीव्र गति से विकसित हो रही है। डिजिटल क्रांति, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, वैश्विक पुनर्गठन और नए कौशल की मांग उच्च शिक्षा को नया रूप दे रही है। सहयोग और नवाचार की संभावनाएं अनंत हैं: एलजी सिन्हा

आज के लिए तैयार किए जा रहे करियर कल बदल सकते हैं। उद्योग नए स्वरूप में ढल रहे हैं। असली सवाल यह नहीं है कि बदलाव आएगा या नहीं, बल्कि यह है कि क्या हम इसके साथ तालमेल बिठा पाएंगे। मेरा मानना है कि वे युवा आगे बढ़ेंगे जिनमें आलोचनात्मक सोच, मूलभूत ज्ञान और आजीवन सीखने का दृढ़ संकल्प होगा: एलजी

हमारा लक्ष्य 2047 तक एक पूर्ण विकसित राष्ट्र बनना है। यह कोई सपना नहीं बल्कि कड़ी मेहनत से प्रेरित एक संकल्प है। इसके लिए लगन, नवाचार, नैतिक शक्ति और निरंतर आविष्कार की आवश्यकता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / रमेश गुप्ता

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