जम्मू-कश्मीर का भविष्य शांति में निहित है, अनुच्छेद 370 हटने से नई संभावनाओं के द्वार खुले हैं: एलजी सिन्हा
श्रीनगर, 31 अक्टूबर (हि.स.)।
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने शनिवार को जम्मू-कश्मीर के दर्दनाक और मुश्किल अतीत को याद करते हुए कहा, ‘ज़ुबान तो खोलो, नज़र तो मिलाओ, मैं टूटा हूँ, मुझे जवाब दो।’
उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि केंद्र शासित प्रदेश का भविष्य आतंकवाद और संघर्ष के बजाय शांति, भरोसे और समान अवसरों की नींव पर टिका होना चाहिए। श्रीनगर के एसकेआईसीसी में केंद्र शासित प्रदेश स्थापना दिवस समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि 1947 से 2019 के बीच का दौर आतंकवाद, अलगाववाद और भारी मानवीय पीड़ा का गवाह रहा है। इस दौरान अनगिनत परिवारों ने अपनों को खोया, और कश्मीरी पंडित आज भी अपने घरों में लौटने का इंतज़ार कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि अगस्त 2019 में हुए संवैधानिक बदलावों ने जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिए उम्मीद और संभावनाओं का एक नया अध्याय खोला है। उन्होंने इसे इस क्षेत्र की यात्रा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर बताया।
उपराज्यपाल ने कहा कि अनुच्छेद 370 को हटाए जाने को केवल एक संवैधानिक फैसले के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए बल्कि इसे राष्ट्रीय एकता, समानता और समावेशी विकास के व्यापक संदर्भ में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इन बदलावों ने जम्मू-कश्मीर के लोगों को शांति, प्रगति और विकास पर आधारित भविष्य की ओर बढ़ने का अवसर दिया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के विज़न को याद करते हुए सिन्हा ने कहा कि देश को राष्ट्रीय एकता को और मज़बूत करने का मौका मिला है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर से किए गए अपने वादों को पूरा करने के लिए काम किया है।
2024 के विधानसभा चुनावों का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में लोकतांत्रिक प्रक्रिया मज़बूत हुई है और लोगों की भागीदारी लोकतंत्र में उनके भरोसे को दर्शाती है। सिन्हा ने कहा कि जम्मू-कश्मीर का भविष्य आतंकवाद के साये में नहीं बल्कि शांति और समान अवसरों के जरिए बनेगा।
उन्होंने जोर देकर कहा कि जनता का भरोसा सिर्फ ठोस कदमों से जीता जा सकता है न कि केवल आश्वासनों से। सुरक्षा हालात पर बात करते हुए उपराज्यपाल ने शांति बहाल करने में सुरक्षाबलों की भूमिका की सराहना की और कहा कि आतंकवाद तथा इसके इकोसिस्टम के खिलाफ लड़ाई जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि सरकार ने आतंकवाद के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' (शून्य सहनशीलता) की नीति अपनाई है और वह आतंकवादियों, उनके समर्थकों तथा नार्को-टेररिज्म (नशीले पदार्थों से जुड़े आतंकवाद) के खिलाफ कार्रवाई और तेज करेगी।
सिन्हा ने बताया कि ड्रग्स के कारोबार और आतंकवाद के साथ इसके संबंधों के खिलाफ की गई कार्रवाई के तहत, उन संपत्तियों को ध्वस्त कर दिया गया है जिन्हें कथित तौर पर ड्रग तस्करी से हुई कमाई से बनाया गया था।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / बलवान सिंह

