जम्मू-कश्मीर विधानसभा में नए डिवीजनों और जिलों से संबंधित पारा के विधेयक को उपराज्यपाल ने पेश करने की सिफारिश की

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जम्मू, 26 मार्च (हि.स.)। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने पीडीपी विधायक वहीद-उर-रहमान पारा द्वारा पेश किए गए एक निजी सदस्य विधेयक को पेश करने और उस पर विचार करने की सिफारिश की है। इस विधेयक में केंद्र शासित प्रदेश में प्रशासनिक डिवीजनों, जिलों, उप-डिवीजनों और तहसीलों के पुनर्गठन के लिए एक वैधानिक ढांचा तैयार करने की मांग की गई है।

जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 की धारा 36 की उपधारा (1) के अनुसरण में जारी एक आधिकारिक आदेश के अनुसार उपराज्यपाल ने विधानसभा में जम्मू-कश्मीर प्रादेशिक प्रशासनिक पुनर्गठन विधेयक, 2026 नामक विधेयक को पेश करने की मंजूरी दे दी है। प्रस्तावित विधेयक में मौजूदा डिवीजनों के अतिरिक्त नए प्रशासनिक डिवीजनों के गठन का प्रावधान है जिनमें डोडा मुख्यालय वाला चेनाब डिवीजन और राजौरी मुख्यालय वाला पीर पंजाल डिवीजन शामिल हैं।

इस विधेयक में कश्मीर मंडल में कई नए जिलों के गठन का भी प्रस्ताव है जिनमें त्राल-अवंतीपोरा पहाड़ी जिला, अशमुकाम-पहलगाम पहाड़ी जिला, बीरवाह, सोपोर, हंदवारा, गुरेज, तंगधार-कर्नाह पहाड़ी जिला और नोराबाद पहाड़ी जिला शामिल हैं।

जम्मू मंडल में विधेयक में केंद्रित प्रशासनिक योजना के लिए नौशेरा, भदरवाह, बनिहाल, थाथरी, अखनूर, बिलवार, कोट्रांका और मेंढर जैसे नए पहाड़ी जिलों के गठन का सुझाव दिया गया है।

मसौदे के अनुसार सरकार को भौगोलिक निरंतरता, प्रशासनिक सुविधा, सामाजिक-सांस्कृतिक सामंजस्य और संतुलित क्षेत्रीय विकास सुनिश्चित करते हुए अधिसूचनाओं के माध्यम से जम्मू, कश्मीर, चिनाब या पीर पंजाल मंडलों को जिले आवंटित करने का अधिकार होगा।

विधेयक के अनुसार इसका उद्देश्य विशाल भौगोलिक क्षेत्रों, दुर्गम भूभागों और क्षेत्रीय असंतुलन से उत्पन्न प्रशासनिक चुनौतियों का समाधान करना और विकेंद्रीकृत शासन और बेहतर सार्वजनिक सेवा वितरण सुनिश्चित करने के लिए नई प्रशासनिक इकाइयों के गठन हेतु एक पारदर्शी विधायी तंत्र प्रदान करना है। यह प्रस्ताव विधानसभा सचिवालय को विचारार्थ प्रस्तुत किया गया है।

विधानसभा का बजट सत्र जो 2 से 20 फरवरी तक चले पहले चरण के समापन के बाद पांच सप्ताह के अवकाश के बाद 27 मार्च को पुनः शुरू होगा। सत्र के प्रारंभिक चरण में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने 6 फरवरी को बजट प्रस्तुत किया जबकि सदन ने प्रत्येक दिन दो बैठकों में विस्तृत चर्चा के बाद विभिन्न विभागों के लिए अनुदान पारित किए। सत्र 4 अप्रैल को समाप्त होने वाला है।

अधिसूचित कार्यसूची के अनुसार 30 मार्च और 1 अप्रैल निजी सदस्यों के विधेयकों के लिए निर्धारित हैं जबकि 31 मार्च और 2 अप्रैल निजी सदस्यों के प्रस्तावों के लिए आरक्षित हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / बलवान सिंह

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