उपराज्यपाल सक्सेना ने लद्दाख में नशीली दवाओं की लत केंद्रों (डीडीएसी) की स्थिति और कामकाज की समीक्षा की

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लेह, 27 मई (हि.स.)। लद्दाख में नशीली दवाओं के दुरुपयोग के मामलों में खतरनाक वृद्धि और इसके आसपास बढ़ती चिंताओं के मद्देनजर उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने आज वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों, नागरिक समाज संगठनों के सदस्यों, धार्मिक संगठनों और गैर सरकारी संगठनों के साथ एक व्यापक बैठक की अध्यक्षता की ताकि लद्दाख में नशीली दवाओं की लत केंद्रों (डीडीएसी) की स्थिति और कामकाज की समीक्षा की जा सके।

हाल के महीनों में लद्दाख में नशीली दवाओं के दुरुपयोग के मामलों में खतरनाक वृद्धि हुई है विशेष रूप से युवाओं, नाबालिगों और यहां तक कि लड़कियों में भी। बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर भी मादक द्रव्यों के सेवन में लिप्त पाए गए हैं। बैठक के दौरान उपराज्यपाल को सूचित किया गया कि एसएनएम अस्पताल, लेह में मनोचिकित्सा ओपीडी ने 237 अनुवर्ती मामलों के साथ 101 नए ओपिओइड से संबंधित मामले, 39 अनुवर्ती मामलों के साथ 25 भांग से संबंधित नए मामले और 40 अनुवर्ती मामलों के साथ 15 पॉलीसब्स्टेंस दुरुपयोग के मामले दर्ज किए हैं। यह भी बताया गया कि मादक द्रव्यों के सेवन के 64 रोगियों में हेपेटाइटिस सी की पुष्टि हुई है।

विचार-विमर्श के दौरान लद्दाख बौद्ध संघ (एल. बी. ए.) की युवा शाखा के अध्यक्ष ने शराब की दुकानों में सख्त शराब की अनुपलब्धता की ओर इशारा किया, जिसके कारण कई लोग तेजी से मादक पदार्थों के दुरुपयोग और मादक पदार्थों की ओर रुख कर रहे थे। उन्होंने उत्पाद श्रृंखला का विस्तार करने और मौजूदा शराब की दुकानों में सख्त शराब उपलब्ध कराने का सुझाव दिया। इसके अलावा मनोचिकित्सकों ने उन मामलों पर भी प्रकाश डाला जहां दैनिक शराब के सेवन के आदी व्यक्ति अक्सर लद्दाख में शराब की अनुपस्थिति में हिंसक और प्रलाप जैसे व्यवहार प्रदर्शित करते थे और दवा के लिए प्रभावी ढंग से प्रतिक्रिया नहीं दे रहे थे। इस पर ध्यान देते हुए उपराज्यपाल ने लद्दाख में मौजूदा उत्पाद शुल्क नीति की समीक्षा करने का आश्वासन दिया। स्थिति पर कड़ी नजर रखते हुए उपराज्यपाल सक्सेना ने कई निर्देश जारी किए जिनमें मादक पदार्थों की आपूर्ति श्रृंखला की पहचान करना और उसे समाप्त करना शामिल है। लद्दाख पुलिस नशीली दवाओं के आपूर्तिकर्ताओं और तस्करों के खिलाफ शून्य-सहिष्णुता नीति अपनाएगी।

क्षेत्र में मादक पदार्थों की तस्करी को रोकने के लिए जोजी-ला और सरचू सहित लद्दाख में प्रमुख प्रवेश बिंदुओं पर वाहनों की जांच स्थानीय टैक्सियों की तलाशी ली जाएगी। यदि टैक्सी चालक मादक पदार्थों की तस्करी में लिप्त पाए जाते हैं तो वाहन जब्त किए जाएंगे।

स्कूलों, कॉलेजों और पर्यटन स्थलों सहित संवेदनशील क्षेत्रों में निरंतर निगरानी ।

आपातकालीन हेल्प लाइन संख्या 112 पुनर्वास और उपचार सहायता चाहने वाले माता-पिता और रोगियों के लिए एक एकीकृत हेल्प लाइन के रूप में कार्य करेगी। 112 प्रभावित परिवारों को समय पर सहायता लेने के लिए प्रोत्साहित करना,हेल्प लाइन नंबर पर किए गए कॉल का जवाब देने के लिए एक सामाजिक कार्यकर्ता, नर्स और परिचारक सहित समर्पित टीमों का गठन।

ठीक होने वाले रोगियों के लिए कौशल विकास और व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करना ताकि उन्हें समाज में फिर से एकीकृत करने और छुट्टी के बाद स्थायी आजीविका अर्जित करने में मदद मिल सके।

पूरे लद्दाख में नशीली दवाओं के दुरुपयोग के खिलाफ जन जागरूकता अभियान, जून 1 के बाद से शुरू हाेगा।

उपराज्यपाल ने कहा, नशीली दवाओं का खतरा हमारे युवाओं और समाज के भविष्य के लिए एक गंभीर खतरा है। लद्दाख से इस चुनौती को समाप्त करने के लिए हमें सामूहिक रूप से और अथक प्रयास करना चाहिए। एल. जी. सक्सेना ने कहा कि डी. जी. पी. को दवा आपूर्तिकर्ताओं और तस्करों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया है साथ ही प्रभावित व्यक्तियों के लिए परामर्श, उपचार, पुनर्वास और सामाजिक पुनर्एकीकरण सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया है। उपराज्यपाल ने अधिकारियों को स्कूलों और कॉलेजों सहित संवेदनशील क्षेत्रों में कड़ी निगरानी बनाए रखने का भी निर्देश दिया और नियमित सहायता समूह बैठकों और जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से माता-पिता को संवेदनशील बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

हिन्दुस्थान समाचार / बलवान सिंह

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