उपराज्यपाल ने पुरमंडल और उत्तरवेहिनी में विरासत स्थलों के जीर्णोद्धार और पुनर्स्थापन की आधारशिला रखी

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उपराज्यपाल ने पुरमंडल और उत्तरवेहिनी में विरासत स्थलों के जीर्णोद्धार और पुनर्स्थापन की आधारशिला रखी


जम्मू, 20 सितंबर (हि.स.)।

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने आज जम्मू के पुरमंडल की प्राचीन विरासत के जीर्णोद्धार, पुनर्स्थापन और पुनरुद्धार के उद्देश्य से 7.15 करोड़ रुपये की परियोजनाओं और पवित्र उत्तरवेहिनी स्थल पर जीर्णोद्धार, पुनर्स्थापन और संबंधित विकास कार्यों के लिए 6.85 करोड़ रुपये की परियोजनाओं की आधारशिला रखी।

इस अवसर पर सभा को संबोधित करते हुए उपराज्यपाल ने कहा कि यह पहल केवल ईंट-पत्थर की मरम्मत तक सीमित नहीं है बल्कि राष्ट्र के गौरवशाली अतीत को उज्ज्वल भविष्य से जोड़ने का प्रयास है। भारत की सांस्कृतिक भावना का उल्लेख करते हुए उपराज्यपाल ने कहा कि इतिहास, पवित्र ज्ञान और धर्म में निहित मूल्यों का संरक्षण किसी भी राष्ट्र की जीवनरेखा है।

जो राष्ट्र अपनी विरासत को भूल जाता है वह अपनी नींव खो देता है। परन्तु जो राष्ट्र अपनी जड़ों का सम्मान करता है उनका संरक्षण करता है और उन्हें पुनर्जीवित करता है वह यह सुनिश्चित करता है कि उसकी आने वाली पीढ़ियाँ आत्मविश्वास, दृढ़ता, आत्मविश्वास और एक मजबूत पहचान के साथ खड़ी हों।

उपराज्यपाल ने कहा कि पवित्र देविका नदी से सुशोभित पुरमंडल सदियों से संतों, ऋषियों और आध्यात्मिक साधकों का तीर्थस्थल रहा है और इसके प्राचीन मंदिर, पत्थर की नक्काशी, पवित्र तालाब और ऐतिहासिक संरचनाएँ उत्कृष्ट स्थापत्य और कलात्मक उपलब्धियों को दर्शाती हैं जिनमें से अधिकांश समय और उपेक्षा के कारण नष्ट हो गई थीं।

उपराज्यपाल ने कहा कि पुरमंडल स्थित प्राचीन लक्ष्मी नारायण मंदिर, प्राचीन शिव मंदिर, प्राचीन राम मंदिर और उत्तरवेहिनी के ऐतिहासिक मंदिर परिसरों का जीर्णोद्धार आधुनिक संरक्षण तकनीकों और पारंपरिक स्थापत्य कला के मिश्रण से किया जाएगा।

उपराज्यपाल ने यह भी कहा कि जीर्णोद्धार कार्य से जम्मू कश्मीर आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन के एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित होगा। बेहतर बुनियादी ढांचे, मार्गों और प्रकाश व्यवस्था से माता वैष्णो देवी जी, शिव खोरी, रघुनाथ मंदिर और बाबा अमरनाथ जी के दर्शन करने वाले तीर्थयात्रियों के लिए सुगम संपर्क स्थापित होंगे साथ ही 'छोटी काशी' की आध्यात्मिक शांति तक पहुंच भी आसान होगी।

क्षेत्र में विरासत पर्यटन के आर्थिक आयाम पर प्रकाश डालते हुए उपराज्यपाल ने कहा कि यह स्थानीय हस्तशिल्प, आतिथ्य, होमस्टे, परिवहन और भोजन प्रतिष्ठानों के लिए एक शक्तिशाली प्रोत्साहन के रूप में कार्य करेगा जिससे युवाओं के लिए आजीविका के अवसर और कारीगरों और छोटे उद्यमियों के लिए नए बाजार सृजित होंगे।

उपराज्यपाल ने कहा कि पवित्र स्थलों के जीर्णोद्धार और नवीनीकरण से आसपास के क्षेत्रों के लोगों को सीधा लाभ होगा।

इन पवित्र स्थलों तक पहुंच में सुधार करके और इनकी भव्यता और गरिमा को बढ़ाकर हम देश और दुनिया के विभिन्न हिस्सों से आने वाले आध्यात्मिक साधकों के लिए पुरमंडल और उत्तरवेहिनी के दिव्य आध्यात्मिक अनुभव के द्वार खोल रहे हैं। मेरा दृढ़ विश्वास है कि इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा और समुदायों का सशक्तिकरण होगा क्योंकि हर पुनर्स्थापित ईंट, हर निर्मित मार्ग और इस स्थान पर आने वाला हर पर्यटक इस क्षेत्र के लोगों की आर्थिक समृद्धि में प्रत्यक्ष योगदान देगा।

उपराज्यपाल ने परियोजना के अंतर-पीढ़ीगत महत्व पर भी जोर देते हुए कहा कि जब युवा पुरमंडल और उत्तरवेहिनी के पुनर्स्थापित गलियारों से गुजरेंगे और सदियों पुरानी कला और संस्कृति के संरक्षण को देखेंगे तो इससे उनमें गर्व की भावना और अपनी जड़ों से जुड़ाव मजबूत होगा। उन्होंने जिला प्रशासन और इस पहल में शामिल सभी हितधारकों की सराहना की और आशा व्यक्त की कि नागरिक भावी पीढ़ियों के लिए इन पवित्र स्थलों के संरक्षण और सुरक्षा में सहयोग करेंगे।

अपनी विरासत को संरक्षित करने के लिए आज किए जा रहे हमारे सक्रिय प्रयास आने वाली पीढ़ियों के लिए सांस्कृतिक आत्मविश्वास, नैतिक शक्ति और सामाजिक सद्भाव के फलदायी होंगे। ये प्रयास हमारी युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से विमुख होने से बचाएंगे और हमारी मिश्रित संस्कृति और प्राचीन जीवन मूल्यों के प्रति स्वाभाविक श्रद्धा का संचार करेंगे।

हिन्दुस्थान समाचार / बलवान सिंह

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