उपराज्यपाल ने स्वास्थ्य के लिए बाजरा पर राष्ट्रीय संवाद का उद्घाटन किया

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उपराज्यपाल ने स्वास्थ्य के लिए बाजरा पर राष्ट्रीय संवाद का उद्घाटन किया


जम्मू, 21 सितंबर (हि.स.)।

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने आज जम्मू स्थित एसकेयूएएसटी में स्वास्थ्य के लिए बाजरा: स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र, जलवायु-लचीली कृषि और टिकाऊ खाद्य प्रणालियों के निर्माण पर राष्ट्रीय संवाद का उद्घाटन किया।

पद्म श्री डॉ. खादर वली जिन्हे भारत का बाजरा पुरुष कहा जाता है और खेती विरासत मिशन के उमेंद्र दत्त के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उपराज्यपाल ने जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश में बाजरा मिशन के माध्यम से एक नई जागरूकता लाने के उनके प्रयासों की सराहना की। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह अवसर केवल एक संगोष्ठी नहीं बल्कि भारत के गांवों में निहित एक क्रांति का उत्सव है।

उपराज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अग्रणी भूमिका जिन्होंने 2018 में बाजरा को पोषक अनाज घोषित किया और इसे श्री अन्न नाम दिया इतिहास में याद रखी जाएगी। प्रधानमंत्री की पहल के फलस्वरूप संयुक्त राष्ट्र ने 2023 को अंतर्राष्ट्रीय बाजरा वर्ष घोषित किया जिससे भारत की पारंपरिक ज्ञान को वैश्विक मान्यता मिली।

बाजरा की विरासत का वर्णन करते हुए उपराज्यपाल ने कहा कि ज्वार, बाजरा, रागी, कोदो बाजरा, छोटा बाजरा, लोमड़ी की पूंछ वाला बाजरा और खलिहान बाजरा ने पीढ़ियों से किसानों और परिवारों का पोषण किया है। कभी गरीबों का भोजन माने जाने वाले बाजरा अब परंपरा और आधुनिक विज्ञान के संगम पर अपना स्थान पुनः प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने प्राचीन ज्ञान अन्नम ब्रह्म को दोहराया - भोजन पवित्र है, और स्वस्थ भोजन स्वस्थ नागरिकों, मजबूत समाजों और लचीले राष्ट्रों का निर्माण करता है।

उन्होंने कहा कि विशेषज्ञ इस बात से भलीभांति परिचित हैं कि बाजरा दशकों से देश के विभिन्न हिस्सों में छोटे और सीमांत किसानों के परिवारों का पोषण करता रहा है। उस समय आधुनिक सिंचाई सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं। सीमांत किसानों के पास न तो उर्वरक थे और न ही सटीक मौसम पूर्वानुमान। हालांकि, बाजरा की फसल को इन चीजों की उतनी आवश्यकता नहीं होती थी क्योंकि यह सबसे कठिन मौसम में भी उग सकती थी और परिवारों को सहारा प्रदान करती थी।

आज विज्ञान नए शोध और प्रमाणों के माध्यम से इस पारंपरिक ज्ञान को समझ रहा है। जलवायु परिवर्तन की चुनौती का सामना कर रहे विश्व के देश भी यह महसूस कर रहे हैं कि भविष्य का भोजन केवल वह भोजन नहीं होगा जिसका बड़े पैमाने पर उत्पादन किया जा सके। यह पौष्टिक, किसानों के लिए लाभदायक और पृथ्वी के लिए टिकाऊ होना चाहिए।

जम्मू कश्मीर के लिए बाजरा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उपराज्यपाल ने रेखांकित किया कि क्षेत्र के 80% से अधिक किसान छोटे और सीमांत किसान हैं जो अनिश्चित मौसम पर निर्भर हैं। बाजरा, जिसे कम पानी और कम संसाधनों की आवश्यकता होती है उन्हें आत्मविश्वास और स्थिरता प्रदान करता है। उन्होंने किसानों से आत्मनिर्भरता और जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लचीलेपन के मार्ग के रूप में बाजरा की खेती को अपनाने का आग्रह किया।

हिन्दुस्थान समाचार / बलवान सिंह

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