लद्दाख पश्मीना और हस्तशिल्प का प्रदर्शन लैक्मे फैशन वीक में, स्टॉल में पारंपरिक शॉल, वस्त्र और हस्तशिल्प प्रदर्शित
लद्दाख, 15 अक्टूबर (हि.स.)। लद्दाख के पारंपरिक पश्मीना, हाथ से बुने वस्त्र और स्वदेशी हस्तशिल्प का प्रदर्शन नई दिल्ली में लैक्मे फैशन वीक में किया जा रहा है जहां क्षेत्र के डिज़ाइनर 18 अक्टूबर को अपने संग्रह प्रस्तुत करेंगे।
प्रवक्ता ने एक बयान में बताया कि फैशन इवेंट में पश्मीना शॉल, पारंपरिक वस्त्र, बारीक कढ़ाई और अन्य स्वदेशी हस्तशिल्प प्रदर्शित करने के लिए एक विशेष स्टॉल लगाया गया है जो 13 से 18 अक्टूबर तक ताज होटल, नई दिल्ली में आयोजित किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि यह प्रदर्शनी चांगथांग समुदाय की पारंपरिक शिल्पकारी को उजागर करती है जिनका पशुपालन जीवन चांगरा बकरियों से घनिष्ठ रूप से जुड़ा हुआ है जिनसे उत्तम पश्मीना फाइबर प्राप्त होता है। प्रवक्ता ने बताया कि चांगथांग पठार की कठोर जलवायु परिस्थितियों के बावजूद चरवाहों ने पीढ़ियों से इस परंपरा को संरक्षित रखा है जिससे लद्दाख का पश्मीना इस क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न अंग बन गया है।
उन्होंने कहा कि स्टॉल में स्थानीय कारीगरों, बुनकरों, कताई करने वालों और महिला उद्यमियों द्वारा निर्मित उत्पाद भी प्रदर्शित किए जाएंगे जो चांगथांग के ऊंचे पहाड़ी चारागाहों से लेकर पारंपरिक कौशल और समकालीन डिजाइनों के मिश्रण से बने तैयार उत्पादों तक पश्मीना की यात्रा को दर्शाते हैं।
प्रवक्ता ने बताया कि लद्दाख के डिजाइनर रविवार, 18 अक्टूबर को रैंप पर अपने संग्रह प्रस्तुत करेंगे जिनमें पश्मीना कृतियों, पारंपरिक कढ़ाई और क्षेत्र के स्वदेशी वस्त्रों की समकालीन व्याख्याएं शामिल होंगी।
उन्होंने कहा कि इस भागीदारी का उद्देश्य चांगथांग के चरवाहों, कारीगरों, शिल्पकारों और महिला नेतृत्व वाले स्वयं सहायता समूहों के योगदान को उजागर करना, साथ ही बाजार पहुंच का विस्तार करना, स्थानीय उद्यमों को बढ़ावा देना और स्थायी आजीविका के अवसर पैदा करना भी है।
उन्होंने आगे कहा कि यह पहल केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन और उद्योग एवं वाणिज्य विभाग द्वारा लघु एवं मध्यम उद्यम प्रदर्शन संवर्धन और तेजी लाने (आरएएमपी) योजना के तहत लद्दाख के हस्तशिल्प और हथकरघा क्षेत्र को मजबूत करने, कारीगरों और स्वयं सहायता समूहों को सहयोग देने, पारंपरिक कौशल को उन्नत करने और स्थानीय उत्पादों की बाजार में दृश्यता बढ़ाने के प्रयासों को दर्शाती है।
प्रवक्ता ने कहा कि इस प्रदर्शनी का उद्देश्य लद्दाख की पारंपरिक शिल्पकला को व्यापक फैशन उद्योग से जोड़ना है, साथ ही इसकी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करना और विकास के नए रास्ते खोलना है।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुमन लता

