कश्मीर एक्सपो कारीगरों को बड़े बाज़ारों और ग्राहकों से जोड़ता है: उद्योग और वाणिज्य सचिव विक्रमजीत सिंह

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श्रीनगर, 11 सितंबर (हि.स.)।

उद्योग और वाणिज्य विभाग के कमिश्नर/सचिव विक्रमजीत सिंह ने शुक्रवार को कहा कि जम्मू-कश्मीर अपने कारीगरों, स्वयं सहायता समूहों और उद्यमियों को प्रदर्शनियों, व्यापार प्रोत्साहन कार्यक्रमों और उत्पाद-प्रमाणीकरण पहलों के माध्यम से बड़े घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय बाज़ारों से जोड़ने के लिए काम कर रहा है।

कश्मीर एक्सपो के बारे में बात करते हुए सिंह ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम कारीगरों, स्वयं सहायता समूहों और उद्यमियों को अपने उत्पादों को प्रदर्शित करने, उनकी मार्केटिंग करने और उन्हें बेचने के लिए एक मंच प्रदान करते हैं साथ ही उन्हें संभावित ग्राहकों से सीधे बातचीत करने और बाज़ार की बदलती मांगों को समझने का मौका भी देते हैं।

सिंह ने कहा कि जम्मू-कश्मीर व्यापार प्रोत्साहन संगठन पूरे केंद्र शासित प्रदेश में कारीगरों, स्वयं सहायता समूहों और उद्यमियों के लिए बाज़ार के अवसर पैदा करने के लिए विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन कर रहा है। उन्होंने कहा कि हमारी कोशिश है कि कारीगरों, स्वयं सहायता समूहों और उद्यमियों को ऐसे अवसर दिए जाएं ताकि वे अपने उत्पादों को प्रदर्शनियों में ला सकें, उन्हें जनता के सामने प्रदर्शित कर सकें और उनकी मार्केटिंग कर सकें।

उन्होंने बताया कि पिछले हफ़्ते पोलो ग्राउंड के पास 'नो योर आर्टिसन' (अपने कारीगर को जानें) अभियान आयोजित किया गया था जबकि कश्मीर में अभी इसी तरह का एक कार्यक्रम चल रहा है। 18 सितंबर से जम्मू में भी एक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा जिससे जम्मू क्षेत्र के कारीगरों, स्वयं सहायता समूहों और स्टार्टअप्स को अपने उत्पादों को प्रदर्शित करने और बेचने का मौका मिलेगा। सिंह ने कहा कि ऐसे व्यापार प्रोत्साहन कार्यक्रम कारीगरों को नए ग्राहकों तक पहुँचने और बाज़ार की ज़रूरतों पर सीधा फ़ीडबैक प्राप्त करने में मदद करते हैं जिससे वे अपने उत्पादों में सुधार, री-डिज़ाइन और इनोवेशन कर पाते हैं। उन्होंने कहा कि स्थानीय कारीगरों को बड़े बाज़ारों तक पहुँच दिलाने के लिए जम्मू कश्मीर के साथ-साथ देश के अन्य हिस्सों में भी प्रदर्शनियाँ आयोजित करने के प्रयास किए जा रहे हैं खासकर उन जगहों पर जहाँ पर्यटक और संभावित ग्राहक ज़्यादा आते हैं।

हाथ से बने उत्पादों की सुरक्षा और उनकी प्रमाणिकता सुनिश्चित करने के बारे में सिंह ने कहा कि हस्तशिल्प विभाग ने एक क्यू आर-कोड सिस्टम शुरू किया है और हस्तशिल्प व हाथ से बने उत्पादों के लिए 18 भौगोलिक संकेत (जी आई) टैग हासिल किए हैं जबकि 17 और टैग की प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने कहा कि इन कोशिशों का मकसद हमारे उत्पादों की अनोखी बौद्धिक संपदा की सुरक्षा करना और ग्राहकों को यह भरोसा दिलाना है कि वे जो हाथ से बना उत्पाद खरीद रहे हैं वह असली है और ज़रूरी मानकों पर खरा उतरता है।

सिंह ने बताया कि टेस्टिंग लैबोरेटरी की क्षमता भी काफी बढ़ाई गई है। अब इन सुविधाओं में हर दिन 150 से ज़्यादा टेस्ट किए जा रहे हैं जबकि दो साल पहले यह संख्या लगभग 20 टेस्ट थी।

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हिन्दुस्थान समाचार / बलवान सिंह

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