मानसिक स्वास्थ्य और तंत्रिका विज्ञान संस्थान में धार्मिक विद्वानों के लिए मादक द्रव्यों के सेवन पर प्रशिक्षण

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श्रीनगर, 03 जनवरी (हि.स.)। मादक द्रव्यों के सेवन के उन्मूलन में धार्मिक विद्वानों की भूमिका को उजागर करने के उद्देश्य से श्रीनगर जिला प्रशासन ने आज यहां मानसिक स्वास्थ्य और तंत्रिका विज्ञान संस्थान (आईएमएचएएनएस) में मस्जिद इमामों और धार्मिक विद्वानों के लिए एक प्रशिक्षण-सह-क्षमता निर्माण कार्यशाला का आयोजन किया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कश्मीर के संभागीय आयुक्त अंशुल गर्ग थे जबकि श्रीनगर के उपायुक्त (डीसी) अक्षय लबरू विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे।

इस कार्यशाला का उद्देश्य समाज में बढ़ते मादक पदार्थों के दुरुपयोग के खतरे को दूर करने में धार्मिक विद्वानों की महत्वपूर्ण भूमिका को उजागर करना था। इसमें घाटी भर से इमामों और उलेमाओं सहित 100 से अधिक प्रमुख धार्मिक विद्वानों के साथ-साथ बड़ी संख्या में प्रतिष्ठित नागरिक और समाज के सदस्य भी शामिल हुए।

श्रीनगर जीएमसी के प्रिंसिपल प्रो. इफ्फत हसन, प्रशासक मोहम्मद अशरफ हकाक, अतिरिक्त उपायुक्त आदिल फरीद, तहसीलदार खानयार, सैयद शाहिद, तहसीलदार वक्फ बोर्ड, इश्तियाक अहमद, नोडल अधिकारी एटीएफ आईएमएचएएनएस, डॉ. अर्शीद, एसएमएचएस अस्पताल के नशामुक्ति केंद्र के प्रभारी डॉ. यासिर और अन्य संबंधित अधिकारी भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

कार्यशाला को संबोधित करते हुए संभागीय आयुक्त कश्मीर ने धार्मिक विद्वानों से लोगों, विशेष रूप से युवाओं को मादक पदार्थों के दुरुपयोग के हानिकारक और खतरनाक प्रभावों के प्रति जागरूक करने में सक्रिय सहयोग और समर्थन का आह्वान किया। उन्होंने विद्वानों से शुक्रवार के उपदेशों के माध्यम से यह संदेश देने का आग्रह किया कि मादक पदार्थों का सेवन न केवल सभी धर्मों में वर्जित है बल्कि यह व्यक्तियों, परिवारों और समाज को भी गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाता है।

उन्होंने कहा कि संबंधित विभागों और संस्थानों को जागरूकता अभियान, पीड़ितों की पहचान और परामर्श सहित तीन चरणों वाली रणनीति अपनानी चाहिए ताकि मामलों में हो रही वृद्धि को रोका जा सके।

उन्होंने मादक द्रव्यों के सेवन के मामलों की शीघ्र रिपोर्टिंग के महत्व पर भी बल दिया और प्रभावित व्यक्तियों और उनके परिवारों से आग्रह किया कि वे पेशेवर परामर्श और विशेषज्ञ मार्गदर्शन के माध्यम से समय पर पुनर्वास के लिए नशामुक्ति केंद्रों से संपर्क करें।

इस अवसर पर बोलते हुए, श्रीनगर के उपायुक्त ने बढ़ते मादक द्रव्यों के खतरे को गंभीर चिंता का विषय बताया और इस गंभीर समस्या को जड़ से उखाड़ने के लिए समाज के सभी वर्गों से सामूहिक प्रयास करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि मादक द्रव्यों का सेवन न केवल व्यसनी का जीवन नष्ट करता है बल्कि पूरे परिवारों को भी तोड़ देता है।

निदेशक ने इस बात पर प्रकाश डाला कि प्रशासन मादक द्रव्यों के सेवन को रोकने के लिए कड़े कदम उठा रहा है, लेकिन धार्मिक विद्वानों और अभिभावकों को सरकार के साथ-साथ महत्वपूर्ण भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने जिला प्रशासन की पुनर्वास नीति के प्रमुख पहलुओं को भी रेखांकित किया, हुई जिसका उद्देश्य मादक द्रव्यों के सेवन पीड़ितों को उनके परिवारों के साथ पुनः जोड़ना है, साथ ही आपूर्ति श्रृंखला को तोड़ने और जिले में मादक द्रव्यों की तस्करी को रोकने के लिए उठाए जा रहे निवारक उपायों के बारे में भी बताया।

जिला परिषद के अध्यक्ष ने नशा पीड़ितों को उनके परिवारों से मिलाने के लिए जिला प्रशासन की पुनर्वास नीति के प्रमुख बिंदुओं और श्रीनगर जिला प्रशासन द्वारा आपूर्ति श्रृंखला को तोड़ने और जिले में नशीली दवाओं की तस्करी को कुचलने के लिए उठाए गए निवारक उपायों पर भी प्रकाश डाला।

कार्यक्रम के दौरान, प्रमुख धार्मिक विद्वानों ने नशीली दवाओं के दुरुपयोग के दुष्परिणामों के बारे में जागरूकता पैदा करने में धार्मिक विद्वानों और उलेमाओं की महत्वपूर्ण भूमिका पर बात की और समाज की सुरक्षा के लिए इस तरह की लक्षित जागरूकता पहलों की आवश्यकता पर बल दिया।

जीएमसी श्रीनगर की प्रधानाचार्य प्रो. (डॉ.) इफ्फत हसन शाह ने रोकथाम, प्रारंभिक हस्तक्षेप और कलंक को कम करने में विश्वसनीय सामुदायिक नेताओं के रूप में इमामों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला।

हिन्दुस्थान समाचार / रमेश गुप्ता

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