पुलिस ने श्रीनगर में नकली हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट के निर्माण और आपूर्ति से जुड़े एक रैकेट के खिलाफ मामला दर्ज किया

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श्रीनगर, 22 मई (हि.स.)। श्रीनगर पुलिस ने शहर और आसपास के इलाकों में नकली हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (एचएसआरपी) के निर्माण और आपूर्ति से जुड़े एक रैकेट के खिलाफ मामला दर्ज किया है। यह मामला एक अधिकृत एचएसआरपी विक्रेता की शिकायत के बाद दर्ज किया गया है जिसने दावा किया था कि नकली नंबर प्लेट सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से खुलेआम बेची जा रही हैं।

सद्दर पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर के अनुसार शिकायत राहुल भासिन ने दर्ज कराई थी जो रोस्मर्टा टेक्नोलॉजीज लिमिटेड के अधिकृत प्रतिनिधि हैं। यह कंपनी पूरे भारत में एचएसआरपी का निर्माण और आपूर्ति करती है और जम्मू-कश्मीर में अधिकांश वाहन निर्माताओं की अधिकृत विक्रेता है।

दक्षिण श्रीनगर के पुलिस अधीक्षक को संबोधित अपनी शिकायत में भासिन ने आरोप लगाया कि अनधिकृत संचालक असली प्लेटों से मिलती-जुलती नकली एचएसआरपी का निर्माण और उन्हें लगा रहे हैं, जिससे एक समानांतर काला बाजार बन रहा है जो राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डाल सकता है और केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई एचएसआरपी योजना के उद्देश्य को विफल कर सकता है। शिकायत में कहा गया है कि कंपनी ने देखा है कि वाहन मालिक असली एचएसआरपी को नकली प्लेटों से बदल रहे हैं। आगे आरोप लगाया गया कि ऐसा ही एक गिरोह टर्बो शाइन कस्टम्स नामक इंस्टाग्राम पेज के माध्यम से काम कर रहा था जो कथित तौर पर श्रीनगर के आशई बाग, नगीन ब्रिज के पास संचालित हो रहा था। आरोपों की पुष्टि करने के लिए शिकायतकर्ता ने कथित तौर पर ग्राहक बनकर गिरोह के संचालकों से संपर्क किया। बातचीत के दौरान नुमान इकबाल नामक एक व्यक्ति ने कथित तौर पर उसे आश्वासन दिया कि नकली नंबर प्लेटें वाहन पंजीकरण प्रमाण पत्रों (आरसी) से लेजर कोड की नकल करके असली एचएसआरपी की हूबहू नकल कर सकती हैं।

आरोपी ने कथित तौर पर प्लेटों के लिए 1,600 मांगे और शिकायतकर्ता के वाहन पंजीकरण नंबर वाली नकली नंबर प्लेटों की तस्वीरें साझा कीं। एफआईआर में बताया गया है कि 2002 में संसद पर हुए हमले के बाद वाहन पहचान प्रणाली को मजबूत करने और अपराधों एवं आतंकी गतिविधियों में वाहनों के दुरुपयोग को रोकने के लिए एचएसआरपी (हाई स्कूल रूट गार्ड) लागू किए गए थे। इन नंबर प्लेटों में लेजर से उकेरे गए विशिष्ट पहचान कोड सहित कई विशेष सुरक्षा विशेषताएं हैं जो सरकारी डेटाबेस से जुड़े होते हैं।

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया द्वारा रोस्मर्टा टेक्नोलॉजीज लिमिटेड को विशेष रूप से आवंटित एए लेजर कोड श्रृंखला का उपयोग करके नकली नंबर प्लेटें बनाई जा रही थीं। शिकायत के अनुसार नकली नंबर प्लेटों में अनिवार्य सुरक्षा विशेषताएं नहीं थीं और ये केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के नियम 50 का उल्लंघन करती थीं। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के निर्देशानुसार सदर पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 173 (3) के तहत प्रारंभिक जांच शुरू की। जांच के दौरान पुलिस ने बांदीपोरा निवासी नोमान इकबाल भट और श्रीनगर के तंगबाग निवासी फाजिल रफीक जान को तलब किया। जांच रिपोर्ट के अनुसार, दोनों व्यक्तियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने टर्बो शाइन कस्टम्स और निशांत एलीट प्लेट्स जैसे इंस्टाग्राम पेजों के माध्यम से एचएसआरपी शैली की नंबर प्लेटें मंगवाई थीं। दोनों ने कथित तौर पर पुलिस को बताया कि उन्होंने शुरू में ये प्लेटें सजावट के उद्देश्य से और सोशल मीडिया रील बनाने के लिए खरीदी थीं। बाद में जब दोस्तों और परिचितों ने रुचि दिखाई तो उन्होंने कथित तौर पर दूसरों के लिए भी इसी तरह की प्लेटें बनवानी शुरू कर दीं जिनकी कीमत 1,400 रुपये प्रति प्लेट थी और इस तरह उन्हें लगभग 400 रुपये प्रति प्लेट का लाभ हुआ।

पुलिस ने बताया कि दोनों आरोपियों ने दावा किया कि उन्हें लगा कि ये प्लेटें कानूनी हैं क्योंकि इस तरह के उत्पादों का विज्ञापन इंस्टाग्राम और अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर खुलेआम किया जा रहा था। जांच में यह भी पता चला कि शिकायतकर्ता ने स्वयं भी इंस्टाग्राम अकाउंट के माध्यम से ऐसी ही एक प्लेट मंगवाई थी और उसे सबूत के तौर पर रखा था। पुलिस ने बताया कि प्रथम दृष्टया मामला बनता है, जिसके चलते भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की प्रासंगिक धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई है जिनमें धोखाधड़ी, जालसाजी, फर्जी दस्तावेज बनाना और प्लेटों और चिह्नों की जालसाजी से संबंधित धाराएं शामिल हैं। हमने इस संबंध में आरोपियों को नोटिस जारी कर जांच में सहयोग करने को कहा है। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि मुख्य आरोपी दिल्ली का रहने वाला है।

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हिन्दुस्थान समाचार / बलवान सिंह

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