सालों में जम्मू कश्मीर ने अपनी ताकत खोई, लीडरशिप उसे वापस पाने में नाकाम रही: रूहुल्लाह

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बारामुला, 23 अगस्त (हि.स.)।

श्रीनगर लोकसभा क्षेत्र से नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसद आगा रूहुल्लाह मेहदी ने रविवार को कहा कि जम्मू-कश्मीर ने पिछले कुछ सालों में लगातार अपनी ताकत खोई है जबकि वहां की राजनीतिक लीडरशिप उसे वापस पाने में नाकाम रही है।

बारामूला में पत्रकारों से बातचीत के दौरान रूहुल्लाह ने कहा कि उनकी आलोचना किसी व्यक्ति या राजनीतिक पार्टी के खिलाफ नहीं है बल्कि यह जम्मू-कश्मीर की व्यापक राजनीतिक स्थिति को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि राज्य का दर्जा (स्टेटहुड) हो या अनुच्छेद 370 जम्मू कश्मीर ने हमेशा चीजें खोई हैं, पाई नहीं हैं। राजनीतिक रूप से जम्मू कश्मीर को शुरू से ही कुछ हासिल नहीं हुआ है।

सत्ता में आने के बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस के रवैये पर सवाल उठाते हुए रूहुल्लाह ने आरोप लगाया कि पार्टी ने 2019 के बाद खोए हुए अधिकारों पर अपना रुख बदल लिया है। उन्होंने कहा कि लोगों ने 2024 के विधानसभा चुनावों के दौरान उन अधिकारों को बहाल करने के वादों के आधार पर एनसी पर भरोसा किया था। उन्होंने कहा कि मैं केवल उन्हीं अधिकारों की बात कर रहा हूं जिनके बारे में हमने चुनाव प्रचार के दौरान लोगों को बताया था। यह सिर्फ मेरी नहीं बल्कि पार्टी की भी बात है। कश्मीरियों ने 2019 के बाद खोए अधिकारों को लेकर एनसी पर भरोसा किया था।

रूहुल्लाह ने आगे सवाल किया कि अगर चुने हुए प्रतिनिधि और पार्टी सदस्य यह मानते हैं कि पार्टी लीडरशिप अपने वादों से भटक गई है तो वे चिंता क्यों नहीं जता सकते। उन्होंने कहा कि मैं पार्टी के खिलाफ मुद्दे क्यों नहीं उठा सकता? हम पार्टी के गुलाम नहीं हैं। अगर पार्टी सही रास्ते पर नहीं है तो हम वाजिब सवाल उठा सकते हैं।

सांसद ने राज्य का दर्जा बहाल करने पर बढ़ते फोकस पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह एकमात्र मुद्दा नहीं है जो एनसी के राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा रहा है। उन्होंने याद दिलाया कि एनसी के उपाध्यक्ष और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने पहले उन लोगों की आलोचना की थी जो केवल राज्य का दर्जा बहाल करने पर ध्यान केंद्रित करते थे और कहा था कि राजनीतिक एजेंडा राज्य का दर्जा बहाल करने से कहीं आगे है। सांसद रूहुल्लाह ने कहा कि राजनीतिक पार्टियां लोगों के प्रति जवाबदेह होती हैं और उन्हें उन लोगों के सवालों के लिए तैयार रहना चाहिए जिन्होंने उनका समर्थन किया था। उन्होंने कहा कि पार्टियां लोगों के प्रति जवाबदेह होती हैं, वे सवालों से ऊपर नहीं हैं। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि अधूरे वादों पर चिंता जताना पार्टी का विरोध नहीं माना जाना चाहिए।

उन्होंने आगे कहा कि उनकी इस पहल का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि चुनाव प्रचार के दौरान लोगों से किए गए वादों और उनके अधिकारों से जुड़े मुद्दे जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बने रहें।

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हिन्दुस्थान समाचार / बलवान सिंह

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