न्यायमूर्ति जावेद इकबाल वानी को विदाई देने के लिए पूर्ण न्यायालय की बैठक आयोजित:
श्रीनगर, 23 मार्च (हि.स.)। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय के श्रीनगर विंग में मुख्य न्यायाधीश के कोर्ट रूम में न्यायमूर्ति जावेद इकबाल वानी जो उच्च न्यायालय के न्यायाधीश थे के सेवानिवृत्ति की आयु प्राप्त करने पर उन्हें विदाई देने के लिए पूर्ण न्यायालय की बैठक आयोजित की गई।
उच्च न्यायालय की दीर्घकालिक परंपराओं और संस्थागत नियमों के अनुसार पूर्ण न्यायालय की बैठक आयोजित की गई।
इस बैठक में मुख्य न्यायाधीश अरुण पल्ली और न्यायमूर्ति संजीव कुमार, न्यायमूर्ति सिंधु शर्मा, न्यायमूर्ति रजनेश ओसवाल, न्यायमूर्ति संजय धर, न्यायमूर्ति राहुल भारती, न्यायमूर्ति मोक्ष खजूरिया काज़मी, न्यायमूर्ति वसीम सादिक नरगल, न्यायमूर्ति राजेश सेखरी, न्यायमूर्ति मोहम्मद यूसुफ वानी, न्यायमूर्ति संजय परिहार और न्यायमूर्ति शहजाद अजीम के साथ-साथ उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के जीवनसाथी भी उपस्थित थे।
इस कार्यवाही में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश और पूर्व न्यायाधीश, विधि, न्याय और संसदीय मामलों के सचिव सहित नागरिक प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी, वरिष्ठ अतिरिक्त महाधिवक्ता, जम्मू और श्रीनगर में भारत के उप सॉलिसिटर जनरल, कश्मीर अधिवक्ता संघ, श्रीनगर के अध्यक्ष, वरिष्ठ अधिवक्ता, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, श्रीनगर, न्यायिक अधिकारी, रजिस्ट्री के अधिकारी; और न्यायमूर्ति जावेद इकबाल वानी के परिवार के सदस्य भी उपस्थित थे। इसके अलावा, जम्मू शाखा के उच्च न्यायालय के अधिकारियों, कर्मचारियों और अधिवक्ताओं ने वर्चुअल माध्यम से कार्यवाही में भाग लिया।
वरिष्ठ अतिरिक्त महाधिवक्ता मोहसिन कादरी ने विदाई भाषण दिया जिसमें उन्होंने विधि के शासन को बनाए रखने के लिए न्यायमूर्ति वानी के समर्पण, न्यायिक दक्षता और अटूट प्रतिबद्धता की सराहना की। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में न्यायमूर्ति वानी का कार्यकाल न्यायिक विवेक, निष्पक्षता और न्याय की गहरी भावना से चिह्नित था, जिसमें गरीबों और हाशिए पर रहने वालों के लिए न्याय तक पहुंच सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया था।
उन्होंने न्यायमूर्ति वानी को एक उत्कृष्ट सज्जन व्यक्ति बताया और उनके सकारात्मक दृष्टिकोण, संस्थागत योगदान और बार के सदस्यों के प्रति सम्मानजनक व्यवहार की सराहना की।
कश्मीर एडवोकेट्स एसोसिएशन श्रीनगर के अध्यक्ष अधिवक्ता वसीम गुल ने अपने विदाई भाषण में न्यायमूर्ति जावेद इकबाल वानी द्वारा दी गई विशिष्ट न्यायिक सेवा की प्रशंसा की और निष्पक्षता, न्याय और संवैधानिक मूल्यों के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता पर प्रकाश डाला।
मुख्य न्यायाधीश ने अपने संबोधन में न्यायमूर्ति वानी की अकादमिक उत्कृष्टता, पेशेवर ईमानदारी और संतुलित न्यायिक स्वभाव की सराहना करते हुए बार और न्यायाधीश दोनों पदों पर उनके समर्पण को उल्लेख किया। उनका कार्यकाल अनुशासन और स्पष्ट विचारों से परिपूर्ण रहा जिसके कारण उन्हें विधि जगत में सम्मान प्राप्त हुआ। न्यायालय ने उनके न्यायिक सफर के दौरान उनके परिवार के अमूल्य सहयोग को भी स्वीकार किया और उनके स्वास्थ्य, सुख और आने वाले वर्षों में उनकी सफलता के लिए हार्दिक आभार और शुभकामनाएं व्यक्त कीं।
न्यायमूर्ति जावेद इकबाल वानी ने अपने उत्तर में मुख्य न्यायाधीश, साथी न्यायाधीशों, बार के सदस्यों, न्यायिक अधिकारियों, रजिस्ट्री के अधिकारियों और न्यायालय के कर्मचारियों के प्रति उनके पूरे कार्यकाल के दौरान सहयोग और समर्थन के लिए गहरा आभार व्यक्त किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि न्याय का प्रभावी वितरण केवल न्यायपालिका और बार के बीच सामंजस्यपूर्ण सहयोग से ही संभव है। उन्होंने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेशों के अधिवक्ताओं की कानूनी कुशलता, पेशेवर क्षमता और प्रतिबद्धता की सराहना की और अपने निजी स्टाफ के समर्पण और सहयोग के लिए भी आभार व्यक्त किया।
पूर्ण न्यायालय संदर्भ की कार्यवाही जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल एम. के. शर्मा द्वारा संचालित की गई।
कार्यवाही समाप्त होने पर न्यायमूर्ति जावेद इकबाल वानी को उनकी विशिष्ट और सराहनीय न्यायिक सेवा के सम्मान और मान्यता के प्रतीक के रूप में सुरक्षा कर्मियों द्वारा गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया।
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हिन्दुस्थान समाचार / रमेश गुप्ता

