जम्मू-कश्मीर क्रिकेट का जेकेसीए घोटाले से रणजी ट्रॉफी में जीत तक का सफर अतीत के भ्रष्टाचार को उजागर करता है: डॉ. अभिजीत जसरोटिया

WhatsApp Channel Join Now
जम्मू-कश्मीर क्रिकेट का जेकेसीए घोटाले से रणजी ट्रॉफी में जीत तक का सफर अतीत के भ्रष्टाचार को उजागर करता है: डॉ. अभिजीत जसरोटिया


जम्मू, 06 मार्च (हि.स.)। जम्मू-कश्मीर भाजपा के प्रवक्ता डॉ. अभिजीत जसरोटिया ने जम्मू के त्रिकुटा नगर स्थित भाजपा मुख्यालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए पिछली सरकारों और विपक्षी दलों की कड़ी आलोचना की। उन्होंने जेकेसीए घोटाले से लेकर जम्मू-कश्मीर क्रिकेट टीम के रणजी ट्रॉफी विजेता बनने तक के सफर पर प्रकाश डाला। जम्मू-कश्मीर क्रिकेट टीम को रणजी ट्रॉफी में ऐतिहासिक जीत के लिए बधाई देते हुए डॉ. अभिजीत ने कहा कि यह जीत न केवल एक खेल उपलब्धि है बल्कि यह दर्शाती है कि कैसे भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और राजनीतिक हस्तक्षेप ने दशकों तक जम्मू-कश्मीर में खेलों को पंगु बना रखा था। डॉ. अभिजीत जसरोटिया ने कहा कि वर्षों से जम्मू-कश्मीर के लोग पूछते रहे कि खेल प्रतिभाओं से समृद्ध यह क्षेत्र आजादी के बाद रणजी ट्रॉफी क्यों नहीं जीत सका। उन्होंने कहा, इसका जवाब जम्मू-कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन (जेकेसीए) के कुप्रबंधन और विवादों में निहित है जहां योग्यता की अनदेखी की गई और राजनीति ने खेल प्रशासन को प्रभावित किया।

जम्मू-कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन (जेकेसीए) घोटाले का जिक्र करते हुए डॉ. जसरोटिया ने कहा कि हालांकि मामला अभी अदालत में विचाराधीन है और वे इसके कानूनी पहलुओं पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे लेकिन यह सार्वजनिक रूप से दर्ज है कि एसोसिएशन एक समय दयनीय स्थिति में पहुंच गया था जिससे युवा क्रिकेटर हतोत्साहित हो गए थे और उनके अवसर अवरुद्ध हो गए थे। उन्होंने कहा कि 2021 के बाद एक महत्वपूर्ण मोड़ आया जब भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के तत्कालीन सचिव जय शाह ने जम्मू-कश्मीर का दौरा किया और केंद्र शासित प्रदेश में क्रिकेट की बिगड़ती स्थिति का गंभीरता से संज्ञान लिया।

उन्होंने कहा, उनके हस्तक्षेप के बाद, व्यवस्था को सुधारने और जम्मू-कश्मीर में क्रिकेट को फिर से खड़ा करने के लिए ठोस कदम उठाए गए। डॉ. जसरोटिया ने इस बात पर प्रकाश डाला कि जम्मू-कश्मीर में नए क्रिकेट मैदान विकसित किए गए और जेकेसीए के कामकाज को पुनर्जीवित करने के लिए एक समर्पित टीम को नियुक्त किया गया। उन्होंने ब्रिगेडियर अनिल गुप्ता, अधिवक्ता सुनील सेठी और पूर्व अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर मिथुन मन्हास को एसोसिएशन में पारदर्शिता, व्यावसायिकता और योग्यता आधारित चयन को बहाल करने का श्रेय दिया। “पहले जहां पक्षपात और भाई-भतीजावाद का बोलबाला था उसके विपरीत क्रिकेट जगत की नई व्यवस्था ने जम्मू और कश्मीर दोनों के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को समान अवसर सुनिश्चित किए हैं।

इस ईमानदार और पारदर्शी दृष्टिकोण का परिणाम आज रणजी ट्रॉफी की जीत के रूप में दिखाई दे रहा है,” उन्होंने कहा। डॉ. जसरोटिया ने उमर अब्दुल्ला द्वारा टीम को बधाई देने की जल्दबाजी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि बधाई का स्वागत है लेकिन उन्हीं नेताओं को जनता को यह भी समझाना चाहिए कि जम्मू-कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन को विवादों और बदनामी में धकेलने में पिछली राजनीतिक व्यवस्थाओं की क्या भूमिका थी।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / रमेश गुप्ता

Share this story