जनता के पैसे को अमानत समझकर करें काम, टिकाऊ और गुणवत्तापूर्ण आधारभूत संरचना बनाएं : उमर अब्दुल्ला

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जम्मू, 15 जून (हि.स.)। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) में नियुक्त किए गए नए जूनियर इंजीनियरों से ईमानदारी, जवाबदेही और गुणवत्ता के साथ कार्य करने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि जनता का पैसा एक पवित्र अमानत है और इसका उपयोग इस प्रकार होना चाहिए कि उससे बनने वाली सड़कें, पुल, अस्पताल और अन्य सार्वजनिक संरचनाएं वर्षों तक लोगों की सेवा कर सकें।

सोमवार को श्रीनगर में आयोजित एक कार्यक्रम में 132 जूनियर इंजीनियर (सिविल) को नियुक्ति पत्र सौंपने के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि ये नियुक्ति पत्र केवल सरकारी नौकरी का दस्तावेज नहीं हैं, बल्कि इनके साथ लाखों लोगों की उम्मीदें और विश्वास भी जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा विकास कार्यों पर खर्च किया जाने वाला प्रत्येक रुपया जनता के कर से प्राप्त होता है, इसलिए उसके उपयोग में पारदर्शिता, ईमानदारी और उत्तरदायित्व सर्वोपरि होना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने युवा अभियंताओं को संबोधित करते हुए कहा कि वे अपने कार्यों के माध्यम से जम्मू-कश्मीर के विकास की मजबूत नींव तैयार करें। उन्होंने कहा कि किसी भी क्षेत्र के विकास की पहचान उसकी आधारभूत संरचना से होती है और इंजीनियर इस विकास यात्रा के सबसे महत्वपूर्ण हिस्सेदार होते हैं। इसलिए यह सुनिश्चित करना उनकी जिम्मेदारी है कि उनके द्वारा निर्मित सड़कें, पुल, सरकारी भवन और अस्पताल उच्च गुणवत्ता वाले हों तथा लंबे समय तक उपयोगी बने रहें।

उन्होंने कहा कि आम नागरिक यह अपेक्षा नहीं करते कि नई बनी सड़क पहली बारिश में ही क्षतिग्रस्त हो जाए या किसी पुल अथवा भवन की गुणवत्ता कुछ वर्षों में ही सवालों के घेरे में आ जाए। जनता चाहती है कि सरकारी धन से निर्मित परियोजनाएं टिकाऊ, सुरक्षित और विश्वसनीय हों। इसलिए प्रत्येक इंजीनियर को अपने कार्य को केवल नौकरी नहीं बल्कि जनसेवा के रूप में देखना चाहिए।

उमर अब्दुल्ला ने नए अभियंताओं से ईमानदारीपूर्वक सेवा करने का आग्रह करते हुए कहा कि सरकारें बदल सकती हैं, प्रशासनिक व्यवस्थाएं बदल सकती हैं, लेकिन जनता की अपेक्षाएं हमेशा एक जैसी रहती हैं। लोगों को बेहतर सुविधाएं, मजबूत आधारभूत संरचना और समय पर विकास कार्य चाहिए। ऐसे में अभियंताओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आने वाले तीन दशकों तक ये युवा अभियंता जम्मू-कश्मीर के विकास कार्यों का नेतृत्व करेंगे। प्रदेश का भविष्य काफी हद तक उनके कार्यों और निर्णयों पर निर्भर करेगा। इसलिए उन्हें अपने पेशेवर जीवन की शुरुआत से ही उत्कृष्टता और जवाबदेही को प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने अभियंताओं से यह भी अपील की कि वे अपनी नियुक्ति के बाद तबादले की मांग करने के बजाय जहां भी उन्हें तैनात किया जाए, वहां पूरी निष्ठा के साथ काम करें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी सेवा का उद्देश्य केवल सुविधाजनक स्थान पर काम करना नहीं है, बल्कि उन क्षेत्रों तक विकास पहुंचाना भी है जहां इसकी सबसे अधिक आवश्यकता है। दूरदराज और दुर्गम क्षेत्रों में कार्य करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना बड़े शहरों में काम करना।

विकास परियोजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली चुनौतियों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कई बार बाहरी परिस्थितियां भी कार्यों को प्रभावित करती हैं। उन्होंने हाल के दिनों में बिटुमेन की कमी के कारण सड़कों के ब्लैकटॉपिंग कार्य में आई कठिनाइयों का उदाहरण देते हुए कहा कि संसाधनों की कमी या अन्य बाधाओं के बावजूद विकास कार्यों को समय पर पूरा करने की प्रतिबद्धता बनी रहनी चाहिए।

उमर ने कहा कि परिस्थितियां हमेशा अनुकूल नहीं होतीं, लेकिन जनहित के कार्यों को पूरा करने का संकल्प कमजोर नहीं पड़ना चाहिए। प्रशासन और इंजीनियरिंग तंत्र का दायित्व है कि उपलब्ध संसाधनों का सर्वोत्तम उपयोग कर जनता को बेहतर सुविधाएं प्रदान की जाएं।

मुख्यमंत्री ने अंत में युवा अभियंताओं से गुणवत्ता और पेशेवर उत्कृष्टता की संस्कृति विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि उनके द्वारा निर्मित प्रत्येक सड़क, पुल और सार्वजनिक भवन उनके कौशल, ईमानदारी और प्रतिबद्धता का प्रमाण होगा। आने वाले वर्षों में लोग उनके कार्यों के आधार पर ही उनके योगदान को याद करेंगे। इसलिए उन्हें ऐसा काम करना चाहिए जो विकास की स्थायी पहचान बने और जम्मू-कश्मीर के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत आधारशिला तैयार करे।

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हिन्दुस्थान समाचार / बलवान सिंह

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