महान कवि, लेखक और रचनाकार अपने ज्ञान और कार्यों के माध्यम से अमर हो जाते हैं : उपराज्यपाल
श्रीनगर, 30 मई (हि.स.)। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने शनिवार को शेर-ए-कश्मीर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन केंद्र (एसकेआईसीसी) में दो दिवसीय कश्मीर साहित्य महोत्सव-2026 का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि एक अच्छा उपन्यास वह प्रभाव उत्पन्न कर सकता है, जिसे संस्थान करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी कई बार हासिल नहीं कर पाते।
उपराज्यपाल ने कहा कि महान कवि, लेखक और रचनाकार अपने ज्ञान और सृजन के माध्यम से अमर हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि मानव शरीर नश्वर है, लेकिन रचनात्मक कार्य अमरता का प्रतीक बन जाते हैं।
देश के विभिन्न हिस्सों से आए अतिथियों का स्वागत करते हुए उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने विश्वास व्यक्त किया कि 30 और 31 मई को आयोजित महोत्सव के दौरान वे कश्मीर की समृद्ध सांस्कृतिक, बौद्धिक और साहित्यिक विरासत का अनुभव करेंगे।
भारतीय पौराणिक कथाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत का साहित्यिक जगत आज भी उस हनुमान की तरह है, जिसने अपनी शक्ति को पूरी तरह नहीं पहचाना। उन्होंने कहा कि भारत की साहित्यिक और बौद्धिक परंपरा को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने की आवश्यकता है।
उपराज्यपाल ने कहा कि औपनिवेशिक मानसिकता से पूरी तरह मुक्त होने का समय आ गया है और देश के इतिहास को विकृत रूप में प्रस्तुत होने से बचाना होगा। उन्होंने कहा कि आधुनिक भारत की बड़ी विफलताओं में से एक यह रही कि उसने अपने इतिहास को सही ढंग से लिखने और संरक्षित करने पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया, जिससे कई भ्रामक कथाओं को बढ़ावा मिला।
उन्होंने कहा कि भारत ने विश्व को गणित, विज्ञान और खगोल विज्ञान जैसी महत्वपूर्ण ज्ञान परंपराएं दी हैं और कई सभ्यताओं ने भारतीय ज्ञान प्रणाली से लाभ उठाया है। आठवीं शताब्दी के फारसी और अरबी ग्रंथों में भी भारत के योगदान को स्वीकार किया गया है।
पढ़ने की संस्कृति में गिरावट की धारणा को खारिज करते हुए मनाेज सिन्हा ने कहा कि वर्ष 2025 में वैश्विक स्तर पर 40 लाख से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हुईं, जो साहित्य और ज्ञान के प्रति लोगों की बढ़ती रुचि को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि नए मंचों और माध्यमों का उपयोग सकारात्मक एवं सशक्त विचारों के प्रसार के लिए किया जाना चाहिए।
दो दिवसीय कश्मीर साहित्य महोत्सव में साहित्यिक चर्चाएं, कविता पाठ, ऐतिहासिक विमर्श और देशभर के लेखकों, इतिहासकारों, शोधकर्ताओं तथा शिक्षाविदों के बीच संवाद आयोजित किए जा रहे हैं। महोत्सव का उद्देश्य साहित्य, संस्कृति और इतिहास से जुड़े विचारों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना है। ------------------
हिन्दुस्थान समाचार / बलवान सिंह

