जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था में 2025-26 में 5.82 फीसदी की वृद्धि : आर्थिक सर्वेक्षण
जम्मू, 05 फ़रवरी (हि.स.)। गुरुवार को विधानसभा में पेश किए गए आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट 2025-26 के अनुसार जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था में 2025-26 में वास्तविक रूप से 5.82 फीसदी की वृद्धि होने का अनुमान है, जो महामारी के बाद स्थिर आर्थिक सुधार और बेहतर राजकोषीय प्रबंधन को दर्शाता है।
रिपोर्ट के अनुसार केंद्र शासित प्रदेश के वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) में 2025-26 के दौरान 5.82 फीसदी की वृद्धि का अनुमान है। रिपोर्ट में कहा गया है कि नाममात्र जीएसडीपी में 8.89 फीसदी की वृद्धि होने की उम्मीद है, जिससे अर्थव्यवस्था का कुल आकार लगभग 2.86 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा। 2019-20 और 2024-25 के बीच जम्मू और कश्मीर ने वास्तविक रूप में 4.47 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) दर्ज की जो महामारी के कारण आई मंदी के बाद निरंतर सुधार को रेखांकित करती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रति व्यक्ति आय में भी लगातार सुधार हुआ है। 2025-26 में 1,68,243 रुपये अनुमानित यह आय पिछले पांच वर्षों से लगातार बढ़ रही है और कई उत्तरी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की तुलना में अधिक तेजी से बढ़ी है।
राज्य के सकल मूल्यवर्धन (जीएसवीए) में तृतीयक क्षेत्र का हिस्सा सबसे अधिक 61.02 प्रतिशत रहा, इसके बाद प्राथमिक क्षेत्र का 20.45 प्रतिशत और द्वितीयक क्षेत्र का 18.52 प्रतिशत रहा। सर्वेक्षण के अनुसार कृषि और संबद्ध गतिविधियां रोजगार और आजीविका का प्रमुख स्रोत बनी हुई हैं, वहीं उद्योग, अवसंरचना और सेवाओं में वृद्धि ने पिछले वर्षों की तुलना में आर्थिक विविधीकरण को बढ़ावा दिया है।
राजकोषीय मोर्चे पर केंद्र शासित प्रदेश ने राजस्व जुटाने और व्यय प्रबंधन में सुधार दर्ज किया है। जीएसटी, उत्पाद शुल्क और बिजली राजस्व जैसे गैर-कर स्रोतों से अधिक संग्रह के कारण नवंबर 2025 तक 13,521 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। सर्वेक्षण में कहा गया है, पूंजीगत व्यय अवसंरचना निर्माण, परिसंपत्ति विकास और चल रही परियोजनाओं को पूरा करने पर केंद्रित रहा। इसमें बीईएएमएस और जीईएम जैसे डिजिटल प्लेटफार्मों के बढ़ते उपयोग के माध्यम से शासन और वित्तीय पारदर्शिता में हुई प्रगति पर भी प्रकाश डाला गया है जिन्होंने हाल के वर्षों में सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन को सुव्यवस्थित किया है।
क्षेत्रवार सर्वेक्षण में कृषि और बागवानी में लाभ की ओर इशारा किया गया जो खाद्यान्न और फलों के उच्च उत्पादन, उच्च घनत्व वाले वृक्षारोपण के विस्तार और किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) में किसानों की बढ़ती भागीदारी से प्रेरित था। ई-एनएएम के एकीकरण के माध्यम से बाजार पहुंच को मजबूत किया गया। नीतिगत सुधारों, नए निवेश प्रस्तावों और नई इकाइयों के संचालन से औद्योगिक विकास को समर्थन मिला जिसके परिणामस्वरूप जम्मू और कश्मीर ने व्यापार करने में सहजता के मामले में राष्ट्रीय स्तर पर 'शीर्ष उपलब्धि हासिल करने वाले' देश का दर्जा प्राप्त किया।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / सुमन लता

