स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर व्यापक प्रयासों से जम्मू-कश्मीर एक उभरते चिकित्सा केंद्र के रूप में स्थापित हो रहा है

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जम्मू, 13 जनवरी (हि.स.)। जम्मू-कश्मीर अपने स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में एक ऐतिहासिक और दूरगामी परिवर्तन का गवाह बन रहा है जो व्यापक अवसंरचना विकास चिकित्सा शिक्षा में अभूतपूर्व विस्तार और भारत सरकार के निरंतर समर्थन से चिह्नित है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण द्वारा पिछले कई वर्षों में किए गए रणनीतिक निवेशों ने केंद्र शासित प्रदेश में स्वास्थ्य सेवा वितरण को मौलिक रूप से नया रूप दिया है यह सुनिश्चित करते हुए कि गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाएं न केवल शहरी केंद्रों में बल्कि ग्रामीण, सीमावर्ती और भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में भी सुलभ हों।

बड़े पैमाने पर स्वास्थ्य सेवा अवसंरचना परियोजनाओं और जमीनी स्तर पर सेवाओं के व्यवस्थित उन्नयन ने जम्मू-कश्मीर के स्वास्थ्य सेवा परिदृश्य को पुनर्परिभाषित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इन पहलों ने न केवल चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार किया है बल्कि केंद्र शासित प्रदेश के दूरदराज और दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के घर के करीब उनकी उपलब्धता भी सुनिश्चित की है।

प्रमुख संस्थान तृतीयक स्वास्थ्य सेवा को नया रूप दे रहे हैं

इस परिवर्तन की आधारशिला जम्मू-कश्मीर में दो अखिल भारतीय आयुर्वेद विज्ञान संस्थानों (एआईएमएस) की स्थापना है—यह उपलब्धि केंद्र शासित प्रदेश के स्वास्थ्य सेवा तंत्र को राष्ट्रीय और वैश्विक मानकों तक ले गई है।

एआईएमएस जम्मू, जो अब पूरी तरह से कार्यरत है, विश्व स्तरीय तृतीयक और सुपर-स्पेशलिटी स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर रहा है। उन्नत निदान, शल्य चिकित्सा और गहन चिकित्सा सुविधाओं से सुसज्जित इस संस्थान ने रोगियों को केंद्र शासित प्रदेश के बाहर विशेष उपचार कराने की आवश्यकता को काफी हद तक कम कर दिया है। रोगी देखभाल के अलावा, एआईएमएस जम्मू चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान के लिए उत्कृष्टता केंद्र के रूप में भी उभरा है, जो इस क्षेत्र में क्षमता निर्माण और चिकित्सा ज्ञान के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।

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हिन्दुस्थान समाचार / रमेश गुप्ता

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