जम्मू और कश्मीर कला, संस्कृति और भाषा अकादमी ने 1 जनवरी, 2026 से प्रतिष्ठित गुरु-शिष्य परंपरा योजना का संचालन शुरू किया
जम्मू, 03 जनवरी (हि.स.)।
केंद्र शासित प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर तीन चयनित गुरुओं द्वारा संरचित प्रशिक्षण कक्षाएं शुरू हो गईं। इस पहल का उद्देश्य गुरु-शिष्य परंपरा के माध्यम से जम्मू और कश्मीर की दुर्लभ और लुप्तप्राय पारंपरिक कलाओं का संरक्षण, पुनरुद्धार और अगली पीढ़ी तक प्रसार करना है।
इस योजना का लक्ष्य पारंपरिक कलाओं के प्रख्यात उस्तादों की पहचान करना और उन्हें युवा शिष्यों के व्यवस्थित प्रशिक्षण में शामिल करना है, जिससे क्षेत्र की समृद्ध और विविध सांस्कृतिक विरासत की निरंतरता और स्थिरता सुनिश्चित हो सके।
इस कार्यक्रम के तहत प्रत्येक चयनित गुरु पांच से आठ शिष्यों के समूह को एक विशिष्ट कला रूप में प्रशिक्षण प्रदान करते हैं। निरंतर जुड़ाव सुनिश्चित करने के लिए गुरु को 10,000 का मासिक मानदेय, सहायक या अनुचर को 7,500 और प्रत्येक शिष्य को 5,000 प्रदान किए जाते हैं। प्रशिक्षण की अवधि एक वर्ष निर्धारित की गई है और प्रदर्शन समीक्षा के आधार पर इसे एक वर्ष के लिए बढ़ाया जा सकता है।
इस योजना को केंद्र शासित प्रदेश भर से जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली जिसमें लगभग 200 आवेदन प्राप्त हुए जिनमें कश्मीर से 63 और जम्मू से 137 आवेदन शामिल हैं। विशेषज्ञों के एक पैनल द्वारा विस्तृत जांच और मूल्यांकन के बाद विलुप्त होने की कगार पर खड़ी तीन पारंपरिक कला शैलियों की पहचान की गई और इन सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों को पुनर्जीवित और संरक्षित करने के लिए प्रतिष्ठित कलाकारों को गुरु के रूप में नियुक्त किया गया।
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हिन्दुस्थान समाचार / रमेश गुप्ता

