विश्व रंगमंच दिवस की पूर्व संध्या पर जम्मू और कश्मीर कला, संस्कृति और भाषा अकादमी ने डोगरी नाटक “जस्मा” का मंचन किया
जम्मू, 27 मार्च (हि.स.)। विश्व रंगमंच दिवस की पूर्व संध्या पर जम्मू और कश्मीर कला, संस्कृति और भाषा अकादमी ने जम्मू के अभिनव थिएटर में क्लस्टर विश्वविद्यालय जम्मू के प्रदर्शन कला विभाग के छात्रों द्वारा प्रस्तुत डोगरी नाटक “जस्मा” का मंचन किया।
इस अवसर पर रंगमंच के क्षेत्र में उनके बहुमूल्य योगदान को मान्यता देते हुए मुख्य अतिथि, संस्कृति विभाग के प्रधान सचिव बृज मोहन शर्मा ने ख्यातिप्राप्त रंगमंच कलाकार बलवंत ठाकुर, मोहन सिंह, दीपक कुमार, अयाश आरिफ और कुमार ए. भारती को सम्मानित किया।
इस अवसर पर क्लस्टर विश्वविद्यालय जम्मू के रजिस्ट्रार अंकुर महाजन, मानविकी और उदार कला संकाय की डीन डॉ. मोनिका शर्मा, प्रदर्शन कला विभाग के समन्वयक कुलदीप रैना, जेकेएएसीएल की सचिव हरविंदर कौर और जेकेएएसीएल की अतिरिक्त सचिव सोनाली अरुण गुप्ता भी उपस्थित थीं।
अपने संबोधन में बृज मोहन शर्मा ने सार्थक प्रस्तुतियों के माध्यम से रंगमंच और क्षेत्रीय भाषाओं को बढ़ावा देने के लिए जम्मू-कश्मीर थिएटर एसोसिएशन (जेकेएएसीएल) और प्रदर्शन कला विभाग के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि रंगमंच सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का एक सशक्त माध्यम है और क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
जेकेएएसीएल की सचिव हरविंदर कौर ने अपने स्वागत भाषण में विश्व रंगमंच दिवस के महत्व पर प्रकाश डाला और सामाजिक जागरूकता, सांस्कृतिक संरक्षण और रचनात्मक अभिव्यक्ति के माध्यम के रूप में समाज में रंगमंच की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में रंगमंच को बढ़ावा देने के लिए कार्यरत रंगमंच कलाकारों और संस्थानों के योगदान की प्रशंसा की।
जस्मा प्रसिद्ध गुजराती नाटक “जस्मा ओदन” का रूपांतरण है, जिसे प्रख्यात रंगमंच कलाकार शांता गांधी ने लिखा था। इस नाटक का डोगरी में अनुवाद जम्मू के दिग्गज रंगमंच कलाकार कवि रतन शर्मा ने किया था जिससे इसे एक विशिष्ट क्षेत्रीय रंग और भाषाई पहचान मिली।
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हिन्दुस्थान समाचार / रमेश गुप्ता

