हस्तशिल्प विभाग की गुणवत्ता नियंत्रण प्रयोगशाला में जीआई क्यूआर लेबलिंग शुरू

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हस्तशिल्प विभाग की गुणवत्ता नियंत्रण प्रयोगशाला में जीआई क्यूआर लेबलिंग शुरू


हस्तशिल्प विभाग की गुणवत्ता नियंत्रण प्रयोगशाला में जीआई क्यूआर लेबलिंग शुरू


श्रीनगर, 22 अगस्त (हि.स.)।

भौगोलिक संकेत परीक्षण और प्रमाणीकरण विशेष रूप से गैर-वस्त्र और लुप्तप्राय शिल्पकलाओं को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कश्मीर के हस्तशिल्प और हथकरघा विभाग ने श्रीनगर स्थित अपने गुणवत्ता नियंत्रण प्रभाग (क्यूसीडी) में जीआई क्यूआर कोड प्रबंधन प्रणाली का औपचारिक रूप से शुभारंभ किया।

एनएबीएल से मान्यता प्राप्त आईआईसीटी और पीटीक्यूसीसी प्रयोगशालाओं के बाद क्यूसीडी जम्मू और कश्मीर की तीसरी जीआई प्रयोगशाला बन गई है। यह अब वाग्गुव, गब्बा, फेल्टेड नमदाह, अखरोट की लकड़ी की नक्काशी, चेन स्टिच, खातंबंद और क्रूएल सहित विभिन्न उत्पादों का परीक्षण करेगी और उन पर जीआई लेबल लगाएगी।

वाग्गुव और नमदाह जैसी लुप्त होती शिल्पकलाओं के लिए जीआई क्यूआर लेबल की शुरुआत से इन पारंपरिक कौशलों को काफी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है जिससे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में इनकी ब्रांड वैल्यू बढ़ेगी।

अधिकारियों ने बताया कि यह पहल कश्मीरी पश्मीना, हाथ से बुने कालीन और कानी व सोज़नी कढ़ाई वाले शॉल जैसे उच्च-मूल्य वाले उत्पादों से परे जीआई प्रमाणन का एक महत्वपूर्ण विस्तार है।

मुख्यमंत्री ने हाल ही में नवीनीकृत क्यूसीडी प्रयोगशाला का उद्घाटन किया था जो उच्च-रिज़ॉल्यूशन डिजिटल माइक्रोस्कोप और अन्य आवश्यक उपकरणों से सुसज्जित है। इस उन्नयन के लिए राष्ट्रीय हस्तशिल्प विकास कार्यक्रम के तहत वस्त्र मंत्रालय और केंद्र शासित प्रदेश के पूंजीगत व्यय बजट द्वारा धन उपलब्ध कराया गया था। हाल तक यह प्रयोगशाला कश्मीर के केवल गैर-जीआई प्रमाणित हस्तनिर्मित उत्पादों पर ही लेबल लगा रही थी।

जीआई क्यूआर लेबलिंग प्रणाली चयनित हस्तनिर्मित उत्पादों की प्रामाणिकता को प्रमाणित करेगी और उन्हें किफायती बाजार में अपनी पकड़ बनाने में मदद करेगी।

अधिकारियों ने आगे बताया कि यह विभाग के क्षमता निर्माण और बेहतर पैकेजिंग के निरंतर प्रयासों का पूरक होगा जिसमें नामदाह, गब्बा और वाग्गुव जैसी लुप्तप्राय शिल्पकलाओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा जिनमें केंद्र शासित प्रदेश के भीतर और बाहर दोनों जगह मजबूत बाजार क्षमता है।

विभाग ने कारीगरों, बुनकरों और अन्य हितधारकों से आग्रह किया है कि वे अपने उत्पादों पर नाममात्र उपयोगकर्ता शुल्क पर लेबल लगवाने के लिए गुणवत्ता नियंत्रण प्रयोगशाला से संपर्क करें जिससे कश्मीर की उत्कृष्ट मध्यम-श्रेणी की हस्तशिल्प कलाकृतियों को आवश्यक ब्रांड मूल्य प्राप्त हो सके।

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हिन्दुस्थान समाचार / बलवान सिंह

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