पिछले साल की तबाही के बाद तवी नदी के कमजोर बांध ने बढ़ाई लोगों की चिंता

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जम्मू,, 16 जुलाई (हि.स.)।

जम्मू में बरसात का मौसम शुरू होते ही तवी नदी के किनारे रहने वाले लोगों की चिंता एक बार फिर बढ़ गई है। एक वर्ष पहले तवी नदी में आई भीषण बाढ़ ने जिस तरह कहर बरपाया था, उसकी याद आज भी लोगों के जहन में ताजा है। नदी के तेज बहाव ने उस मजबूत किनारे को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया था जहां से लोग सीढ़ियों के माध्यम से तवी नदी तक पहुंचते थे। पत्थर और सीमेंट से बने इस पक्के बांध को भी तवी की उफनती लहरें नहीं रोक सकीं। यही नहीं किनारे पर स्थित मंदिर भी नदी की चपेट में आकर क्षतिग्रस्त हो गया जिसके अवशेष आज भी पिछले साल की तबाही की गवाही दे रहे हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि संबंधित विभाग ने क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत तो कर दी है लेकिन इस बार पत्थर और मिट्टी से बनाए गए अस्थायी बांध की मजबूती पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। लोगों का मानना है कि जब पहले का मजबूत कंक्रीट का बांध तवी के तेज बहाव को नहीं झेल सका तो वर्तमान में बनाया गया यह अस्थायी बांध पहली बड़ी बाढ़ में ही बह सकता है।

तवी नदी के किनारे बसे लोगों का कहना है कि बरसात सिर पर है और अब इस बांध को और मजबूत करने के लिए पर्याप्त समय भी नहीं बचा है। उनका आरोप है कि विभाग ने केवल औपचारिकता निभाई है जबकि जरूरत थी कि प्रभावित हिस्से पर मजबूत कंक्रीट का सुरक्षा बांध बनाया जाता। लोगों का कहना है कि अब उनकी उम्मीद केवल भगवान से है कि इस बार तवी नदी शांत रहे और पिछले वर्ष जैसी तबाही दोबारा न हो। स्थानीय नागरिकों का मानना है कि आने वाली पहली बड़ी बाढ़ ही यह तय करेगी कि वर्तमान सुरक्षा व्यवस्था कितनी कारगर साबित होती है।

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हिन्दुस्थान समाचार / अश्वनी गुप्ता

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