भाजपा पर आरोप लगाने का फारूक अब्दुल्ला का नैतिक अधिकार नहीं : पूर्व मंत्री
जम्मू, 20 जनवरी (हि.स.)। वरिष्ठ भारतीय जनता पार्टी नेता एवं जम्मू-कश्मीर के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री बाली भगत ने मंगलवार को नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला के हालिया बयानों पर तीखा पलटवार किया। भगत ने कहा कि भाजपा पर हिंदू-मुस्लिम विभाजन को बढ़ावा देने के आरोप लगाकर फारूक अब्दुल्ला अपने राजनीतिक विफलताओं और विवादित विरासत से ध्यान भटकाने का प्रयास कर रहे हैं। फारूक अब्दुल्ला द्वारा देश में “नफरत की आग” फैलाने और चुनावी लाभ के लिए समुदायों को बांटने संबंधी बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए बाली भगत ने कहा कि उन्हें सांप्रदायिक सौहार्द पर उपदेश देने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि जम्मू-कश्मीर में सबसे बड़ा सामाजिक और सभ्यतागत विभाजन उन्हीं के शासनकाल में हुआ, जब कश्मीरी पंडितों को अपने ही घरों से पलायन करने के लिए मजबूर होना पड़ा।
बाली भगत ने कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस के शासन के दौरान घाटी में भय का माहौल बना, लक्षित हत्याएं हुईं और सदियों पुराना सह-अस्तित्व टूट गया। उन्होंने आरोप लगाया कि आज भाजपा पर सांप्रदायिक राजनीति का आरोप लगाना वास्तविक मुद्दों से ध्यान हटाने की रणनीति है। पूर्व मंत्री ने यह भी कहा कि जब भी फारूक अब्दुल्ला के पास शासन, सुरक्षा या अतीत की जवाबदेही को लेकर कोई ठोस उत्तर नहीं होता, तो वे पाकिस्तान या भाजपा पर आरोप लगाने लगते हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद जम्मू-कश्मीर की सच्चाई है और इस पर अस्पष्ट बयान देना राष्ट्रीय हितों के विपरीत है।
बाली भगत ने आरोप लगाया कि हिंदू-मुस्लिम बयानबाजी घटते जनाधार को बचाने का प्रयास है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा राष्ट्रवाद, समान अधिकार और समावेशी विकास में विश्वास रखती है, न कि तुष्टिकरण या विभाजन की राजनीति में। उन्होंने कहा कि सांप्रदायिक सौहार्द भाषणों से नहीं, बल्कि न्याय, सुरक्षा और अतीत की गलतियों को स्वीकार करने से बनता है। बाली भगत ने दोहराया कि इतिहास को बदलने या भाजपा को सांप्रदायिक बताकर सच्चाई से बचने की कोशिश सफल नहीं होगी और नेशनल कॉन्फ्रेंस की भूमिका पर सवाल उठते रहेंगे।
हिन्दुस्थान समाचार / राहुल शर्मा

