कश्मीर में ईद का जश्न , जामा मस्जिद में नमाज पर प्रतिबंध

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श्रीनगर, 21 मार्च (हि.स.)। शनिवार को कश्मीर में ईद-उल-फितर पारंपरिक उत्साह और उमंग के साथ मनाई गई। डल झील के किनारे स्थित हजरतबल दरगाह में श्रद्धालुओं की सबसे बड़ी सभा एकत्रित हुई। हालांकि अधिकारियों ने श्रीनगर शहर की ऐतिहासिक जामा मस्जिद में ईद की नमाज की अनुमति नहीं दी।

हजरतबल में 50,000 से अधिक श्रद्धालुओं ने नमाज अदा की जो कश्मीर में ईद की सबसे बड़ी सभा थी। शहर के नौहट्टा इलाके में स्थित जामा मस्जिद में भारी संख्या में सुरक्षा बलों को तैनात किया गया था ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि लोग इन स्थानों पर नमाज के लिए एकत्रित न हों। अंजुमन औकाफ जामा मस्जिद ने घोषणा की थी कि ईद की नमाज जामा मस्जिद में अदा की जाएगी और अधिकारियों से धार्मिक आयोजन पर कोई प्रतिबंध न लगाने का आग्रह किया था।

कश्मीर के मुख्य मौलवी मीरवाइज उमर फारूक ने एक्स पर पोस्ट किया कि लगातार सातवें वर्ष, प्रतिबंधों और नजरबंदी के बीच जामा मस्जिद में ईद की नमाज पर रोक लगी हुई है। मुसलमानों के लिए उत्सव का दिन मातम और निराशा में बदल गया है। उन्होंने कहा कि हमारे समय की विडंबना है कि जो लोग हमारी मस्जिदों और ईदगाहों को बंद करते हैं, वही सबसे पहले हमें ईद मुबारक की शुभकामनाएं देते हैं।

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला हजरतबल में नमाज अदा करने वाले प्रमुख व्यक्तियों में शामिल थे। ईद की नमाज के बाद अमेरिका विरोधी और इजरायल विरोधी प्रदर्शनों की आशंका के मद्देनजर अधिकारियों ने शहर के संवेदनशील स्थानों पर बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों को तैनात किया। घाटी के सभी जिलों से ईद की नमाज के लिए बड़ी संख्या में लोगों के इकट्ठा होने की सूचना मिली। सभी उम्र के मुसलमान अपने सबसे अच्छे कपड़े पहनकर ईदगाहों, मस्जिदों और दरगाहों में नमाज अदा करने के लिए एकत्रित हुए।

रमजान के समापन के उपलक्ष्य में मुसलमान अपने रिश्तेदारों और दोस्तों से मिलने जाते हैं और उपहारों और शुभकामनाओं का आदान-प्रदान करते हैं। बच्चे ईद का बेसब्री से इंतजार करते हैं क्योंकि इस खास दिन उन्हें ईदी (नकद उपहार) मिलती है।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुमन लता

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